
Narmada Parikrama
जबलपुर. जीवन दायिनी नर्मदा नदी की परिक्रमा का विशेष महत्व है। सामान्यत: श्रद्धालु नर्मदा परिक्रमा पैदल या वाहनों से करते हैं। कुछ लोग कठिन परिक्रमा का भी संकल्प लेते हैं। सीहोर जिले के नसरुल्लागंज निवासी बुजुर्ग संत रमेश दास बैरागी (67) ने भी नर्मदा परिक्रमा का कठोर संकल्प लिया है। वे चार हजार किलोमीटर की यात्रा दंडवत होकर कर रहे हैं। परिक्रमा के दौरान वे नर्मदा संरक्षण, गो संरक्षण और बेटियों को बचाने के लिए लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। गुरुवार को वे दंडवत परिक्रमा के दौरान अमरकंटक जाते हुए संस्कारधानी से गुजरे।
नसरुल्लागंज के 67 वर्षीय संत का कठोर संकल्प, अमरकंटक जाते हुए शहर से गुजरे
उन्होंने बताया कि वे 28 जनवरी 2020 को हरदा जिले के हंडियाघाट से दंडवत परिक्रमा पर निकले हैं। दंडवत परिक्रमा पूर्ण करने का समय निर्धारित नहीं होता। वे परिक्रमा का समापन हरदा के हंडियाघाट में ही करेंगे।
फैक्ट फाइल
3600 किमी लंबा है नर्मदा का परिक्रमा मार्ग
08 महीने परिक्रमा, चातुर्मास के चार माह बंद रहती है।
120 दिन परिक्रमा पूरी करने में लगते हैं।
व्यवस्थित मार्ग का अभाव
सरकार व्यवस्थित परिक्रमा मार्ग या पथ आज तक नहीं बना पाईं हैं। ऐसे में परिक्रमा करने वालों को आज भी खेतों, जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाडिय़ों व पगडंडियों से होकर ही गुजरना पड़ रहा है। खाने पीने व ठहरने के उचित इंतजाम न होने से नर्मदा तटों पर रहने वाले ही परिक्रमावासियों के लिए दशकों से सारी व्यवस्थाएं नि:स्वार्थ भाव से जुटा रहे हैं। सरकारी संस्थाएं भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही हैं।
Published on:
15 Dec 2023 11:59 am
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