बताया जाता है कि यहां भगवान नृसिंह एक ऐसी प्रतिमा स्थापित है, जिससे सोने जैसी आभा निकलती है, जबकि इसमें सोने का नाममात्र के लिए भी मिश्रण नहीं है। ये प्रतिमा पीतल की बताई जाती है। प्रदेश ही नहीं पूरे देश से दर्शनार्थ यहां लोग आते हैं। यह मंदिर सौ साल से भी अधिक पुराना है। संतों की चौथी पीढ़ी यहां साधना कर रही है।