ठगों ने सिर्फ सागर को नहीं, बल्कि उसके भाई-बहनों को भी सरकारी नौकरी दिलाने का सपना दिखाया। भरोसा इतना बढ़ा कि सागर ने धीरे-धीरे अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी दांव पर लगा दी। उसने शहीद पिता की सरकारी सहायता राशि, घर के गहने, जमीन के प्लॉट और यहां तक कि पुश्तैनी घर तक बेच दिया। हालात इतने बिगड़े कि अंत में उसने अपनी बीमा पॉलिसी भी तुड़वा दी। कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम आरोपियों के हाथों में चली गई।