23 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पत्नी के इलाज के लिए छटपटाता रहा किसान, नहीं मिला बिकी धान का पैसा

दिल में वाल्व हो गए थे खराब, पैसों का इंतजाम नहीं होने से हो गई मौत, सिहोरा तहसील की ग्राम पंचायत बेला का मामला
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Abha Sen

•

Updated: 18 Jan 2017, 7:22 PM IST

death

death

सिहोरा। डॉक्टर ने दिल के वाल्व खराब बता दिए थे। अहमदाबाद में ऑपरेशन के लिए कहा था। लेकिन उसके पास इतना रुपया नहीं था कि ऑपरेशन करा सके। उसने सोसायटी ने धान बेची थी। बेची धान का पैसा पाने 15 दिनों तक चक्कर लगाता रहा, लेकिन रुपया नहीं मिला। इलाज नहीं मिलने से किसान की पत्नी की बुधवार को मौत हो गई। मामला सिहोरा तहसील की ग्राम पंचायत बेला का है।

ये है पूरा मामला
ग्राम बेला के किसान गंगाराम तिवारी (58) ने बताया कि पत्नी अल्का तिवारी (50) 30 दिसम्बर को अचानक सीने में दर्द उठा। जबलपुर में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने बताया कि दिल में वाल्व खराब हो गया। जिसका ऑपरेशन अहमदाबाद में होगा, जिसमें लंबा खर्च आएगा। दो एकड़ जमीन से गंगाराम किसी तरह अपना परिवार चलाता था।


सिर्फ बैंक में चक्कर पर चक्कर
गंगाराम ने 25 दिसम्बर को प्राथमिक कृषि सहकारी समिति में 89 बोरी (35 क्विटल) धान बेची थी। विक्रय धान की राशि 52332 रुपए थी। पत्नी के इलाज के इस राशि के लिए किसान गंगाराम 15 दिनों तक जिला सहकारी बैंक और समिति के चक्कर लगाता रहा। बैंक के अधिकारी किसान को यहां से वहां भटकाते रहे। किसान को फसल बीमा की राशि 20795 का प्रमाण पत्र भी मिला था, लेकिन खाते में राशि नहीं आई।

death

आखिरकार हो गई मौत
इलाज के लिए रूपयों का इंतजाम नहीं होने से बुधवार सुबह किसान गंगाराम की पत्नी अल्का की मौत हो गई। किसान ने आरोप लगाया कि बैंक और समिति की लापरवाही के चलते उसकी पत्नी की मौत हुई है। समय रहते धान और बीमा की राशि मिल जाती तो उसकी पत्नी की जान बच जाती।