
jabalpur painting
संस्कारधानी के चित्रकार ने बनाई थी रानी दुर्गावती की सबसे पहली पेंटिंग
बेजोड़ हैं जबलपुर की चित्रकला और चित्रकार, युवा कलाकार भी कर रहे नाम रोशन
जबलपुर।
संस्कारधानी में कला और साहित्य को हमेशा उच्च सम्मान दिया जाता रहा है। यही वजह है कि वर्षों से यहां चित्रकला फलती फूलती रही है। जबलपुर की धरती को देश को ऐसा चित्रकार देने का गौरव प्राप्त है, जिन्होंने देश के संविधान की प्रस्तावना सहित अन्य पृष्ठ डिजाइन किए। गोंडवाना की साम्राज्ञी रानी दुर्गावती का पहला चित्र भी यहीं बनाया गया। संस्कारधानी में ब्यौहार राममनोहर सिंहा से लेकर अमृतलाल वेगड़, अलबन ग्रेगरी, हरि भटनागर, सुभाष खरे व वर्तमान पीढ़ी के विनय अम्बर व सुप्रिया अम्बर तक चित्रकारों की अटूट श्रृंखला चली आ रही है। आकृतिमूलक चित्रकारी के लिए ख्यात यहां के चित्रकारों को मिली देशव्यापी ख्याति उनकी वर्षों की कलासाधना का परिणाम है।
शांति निकेतन के छात्रों ने दिखाए हुनर-
गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के शांति निकेतन से चित्रकला सीखकर आये कलाकारों ने शहर में चित्रकला को नए आयाम दिए। इनमें ब्यौहार राममनोहर सिंहा का नाम अग्रणी है। बुजुर्ग चित्रकार देवेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि ब्यौहार राममनोहर सिंहा शांति निकेतन के छात्र थे। वहीं से उन्होंने आकृतिमूलक चित्रकला सीखी थी। यहां आकर उन्होंने इतिहास व स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कुछ बेहतरीन आकृतिमूलक चित्र बनाये थे। इनमे जलियांवाला बाग हत्याकांड व रानी दुर्गावती के चित्र प्रमुख हैं। ये चित्र आज भी गोलबाजार स्थित शहीद स्मारक की दीर्घा में लगे हैं। देवेंद्र प्रताप ने बताया कि सिंहा ने भारत के संविधान की प्रस्तावना भी डिजाइन की थी। स्वतंत्रता के बाद सिंहा चाइनीज पेंटिंग सीखने चीन गए। वहां से आकर उनकी शैली बदल गई और उसमें चीनी चित्रकला की झलक नजर आई।देश को नर्मदा नदी व उसकी परिक्रमा की महत्ता समझाने वाले अमृतलाल वेगड़ का नाम शांति निकेतन से शिक्षित कलाकारों की कड़ी में अगला है। उनके बनाये कोलाज आज भी कला प्रेमियों को लुभाते हैं। इसके बाद जबलपुर फाइन आर्ट्स कॉलेज (वर्तमान में जबलपुर ललित कला संस्थान) के प्राचार्य रहे हरि भटनागर का नाम आता है। वरिष्ठ चित्रकारों ने बताया कि भटनागर ने शहर की चित्रकला को नई दिशा दी। उनके द्वारा प्रशिक्षित कई कलाकार आज देश भर में अपनी कला के जौहर दिखा रहे हैं।
दूसरी पीढ़ी में आया मॉडर्न आर्ट-
सिंहा, वेगड़ व भटनागर के बाद शहर की चित्रकला को उभारने वालों में प्रमुख नाम विष्णु चौरसिया का है। जेजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स के छात्र रहे चौरसिया शहर में पहली बार मॉडर्न आर्ट लेकर आये। उन्होंने लैंड स्केप व क्रिएटिव पेंटिंग की कला को शहर में स्थापित कर ऊंचाइयां दीं। जबलपुर फाइन आर्ट्स कॉलेज के ही छात्र स्व अलबन ग्रेगरी का नाम भी इसी कड़ी में जुड़ता है। ग्रेगरी को उनकी आकृतिमूलक व आधुनिक पेंटिंग के फ्यूज़न के लिए देश भर में ख्याति मिली। ललित कला संस्थान के छात्र रहे सुभाष खरे व विजय ठाकुर ने भी शहर की चित्रकला को ख्याति दिलाई। ये सभी चित्रकार आधुनिक पेंटिंग की कला में माहिर थे।
नई पीढ़ी को विनय का मार्गदर्शन-
चित्रकला में शहर की तीसरी पीढ़ी के अगुआ विनय अम्बर माने जाते हैं। वे भी ललित कला संस्थान के छात्र रहे। अम्बर ने मॉर्डन आर्ट, लोकशैली व आकृतिमूलक चित्रकलाओं को मिश्रित कर अपनी ही शैली विकसित की है। उनके चित्रों में महिलाओं व वंचित वर्ग का दर्द उभर कर सामने आता है। उनकी पेंटिंग्स में मछली व चांद को निराशा व आशा के प्रतीक रूप में प्रयुक्त किया जाता है। उनके समकक्ष चित्रकारों का कहना है कि विनय अम्बर संस्कारधानी की चित्रकला को बहुत आगे ले गए हैं। विनय के साथ उनकी पत्नी सुप्रिया भी आकृतिमूलक चित्रकला की बेहतरीन कलाकार हैं। वे मूलतः ग्रामीण कामकाजी व मजदूर महिलाओं को ध्यान में रखकर पेंटिंग करती हैं।विनय व सुप्रिया की पेंटिंग्स देश की कई महत्वपूर्ण कला प्रदर्शनियों में प्रदर्शित की जा चुकी हैं। कला समीक्षक दोनों की पेंटिंग्स में खासी सम्भावनाएं देखते हैं। शरनजीत सिंह गुरु, सरिता राठौर भी उनके समकक्ष चित्रकार हैं चित्रकार संजय भाटिया कहते हैं कि विनय व सुप्रिया सहित पुराने चित्रकार शहर के नवोदित चित्रकारों के लिए मार्गदर्शक व सहयोगी हैं।
अब मेहनत से कतराते हैं-
संस्कारधानी की यह समृद्ध कला अब युवाओं को अधिक नहीं लुभा पा रही है। चित्रकार विनय अम्बर कहते हैं कि युवा वर्ग में पेंटिंग कला के लिए आवश्यक धैर्य की कमी है। इस कला के लिए शोधकार्य व लगातार निरीक्षण करना पड़ता है। ग्लोबलाइजेशन के बाद 2000 के दशक से तकनीक का प्रयोग बढ़ा। इससे कलाकारों का व्यापक व वैश्विक कला से परिचय हुआ। पेंटिंग कला में भी आमूलचूल बदलाव आए। इन बदलावों को समझते हुए अपनी कला को परिष्कृत करने के लिए बहुत मेहनत की आवश्यकता होती है। जो आज के युवाओं को नहीं भाता। इसलिए चित्रकला के क्षेत्र में युवाओं की दस्तक कम है।
50 लाख में बिकी पेंटिंग-
विनय अम्बर के चित्रों को देश की चित्र प्रदर्शनियों में खासा महत्व दिया जाता है। उन्होंने बताया कि 2008 में आदिवासी महिला मजदूर पर बनाई उनकी एक पेंटिंग खजुराहो में प्रदर्शनी के दौरान 10 हजार रु में बिकी थी। वह पेंटिग बाद में कई बार बिकी। बीते वर्ष उनके पास मुम्बई के एक व्यापारी का फोन आया। उसने बताया कि मुम्बई के मलाड हाउस में लगी वह पेंटिंग उसने खरीदी है। पेंटिंग विनय की ही है, यह तस्दीक करने के बाद उसने बताया कि उक्त पेंटिग उसने 50 लाख रु में खरीद ली थी।
ये बढ़ा रहे परिपाटी-
संस्कारधानी की समृद्ध चित्रकला परिपाटी को अब कुछ युवा आगे बढ़ा रहे हैं। इनमे अर्चना श्रीवास्तव, अरुणा झा,सुरेंद्र राव, राकेश तिवारी के नाम उल्लेखनीय हैं। ये सभी चित्रकार देश के कई मंचों पर अपनी पेंटिंग्स से सराहना बटोर चुके हैं।
Published on:
14 Mar 2023 12:46 pm
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