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#Accident : शहर की सड़कों पर नशे में दौड़ती मौत, 11 लोगों ने गंवाई जान

#Accident : शहर की सड़कों पर नशे में दौड़ती मौत, 11 लोगों ने गंवाई जान

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भीषण हादसा : तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर ने ऑटो को मारी जोरदार टक्कर, 3 लोगों का हुआ ये हाल

जबलपुर. बेलगाम रफ्तार और नशा संस्कारधानी में लोगों की जान ले रहा है। शहर की सडक़ों पर नशे में दौड़ती मौत के मामले में जबलपुर देश के मेट्रो शहरों में तीसरे नम्बर पर है। उससे आगे उत्तरप्रदेश के दो मेट्रो शहर कानपुर और प्रयागराज हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक जबलपुर शहर में 2022 में 138 सडक़ हादसे नशे की वजह से हुए। इनमें 11 लोगों ने जान गंवाई और 120 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों से भी आगे

इस मामले में जबलपुर ने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और चेन्नई जैसे महानगरों को भी पीछे छोड़ दिया है। इन शहरों में ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ के आंकड़े दहाई में हैं। प्रयागराज में 265 हादसे और 104 मौतें व कानपुर में 172 हादसे और 65 मौतें दर्ज की गई हैँ।

गति कम फिर भी घटनाएं: शहर के भीतर व्यस्ततम इलाकों में भी सड़क हादसों का ग्राफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। शहर में कई ऐसी सड़के हैं, जहां वाहनों की रफ्तार पांच से दस किलोमीटर प्रतिघंटा, इसके बावजूद भी वहां हादसे हुए।

नहीं किए इंतजाम: जहां बार-बार सडक़ हादसे हुए, ऐसे स्पॉट्स को पुलिस, प्रशासन और अन्य एजेंसियों ने ब्लेक स्पॉट्स के रूप में चिन्हित किया। यह दावा किया गया कि वहां सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए जाएंगें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इनमें सर्वाधिक प्वाइट्स नेशनल हाईवे और उसके बाद स्टेट हार्दवे में है।

शहर में ढाई हजार दुर्घटनाएं

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक शहर में 2022 में 2460 हादसों में 167 लोगों को जान गंवाना पड़ी वहीं 2439 लोग घायल हुए। इसी प्रकार तेज रफ्तार से वाहन चलाने के 1229 मामलों में 36 मौतें और 1217 लोग घायल हुए। वहीं खतरनाक वाहन चलाने के 37 हादसों में 6 मौतें और 17 लोग घायल हुए।

नहीं की जाती पेट्रोलिंग

नेशनल हाईवे पर पेट्रोलिंग के लिए एनएचएआई द्वारा पेट्रोलिंग टीम रहती है। इस वाहन में तैनात अधिकारी और जवानों को निर्धारित सडक़ पर पेट्रोलिंग करनी होती है। लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि एनएचएआई की पेट्रोलिंग जबलपुर से लेकर सिहोरा, जबलपुर से लेकर भोपाल और जबलपुर से बरेला तक नजर नहीं आती।

ट्रेफिक गति को नियंत्रित करने के लिए लोगों में जागरुकता जरूरी है। अधिकतर हादसे अनियंत्रित गति के कारण होते हैं। इनमें घायल और मृतकों की संख्या भी अधिक रहती है। शहरी क्षेत्र में भी ब्लैक स्पॉटस खत्म करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

संतोष शुक्ला, डीएसपी ट्रेफिक