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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता शशांक शेखर को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, विधि एवं वित्त विभागों के प्रमुख सचिवों तथा अन्य अधिकारियों के साथ 27 अगस्त को बैठक करने के निर्देश दिए। जस्टिस जेके महेश्वरी व जस्टिस आरके श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच ने मप्र हाईकोर्ट के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के वेतनमान विसंगति की समस्या का ठोस समाधान निकालने के लिए यह निर्देश दिए। अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।
यह है मामला
जबलपुर निवासी किशन पिल्ले, अरविंद दुबे, शिव सहाय सक्सेना सहित मप्र हाईकोर्ट के 109 तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ओर से ये अवमानना याचिकाएं दायर की गईं। कहा गया कि मप्र हाईकोर्ट के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अन्य हाईकोर्ट के कर्मियों की अपेक्षा बहुत कम वेतनमान मिलता है। अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने तर्क दिया कि वेतनमान पुनरीक्षण के लिए दायर कर्मियों की याचिकाओं का 28 अप्रैल 2017 को हाईकोर्ट ने निराकरण कर दिया। सरकार को निर्देश दिए गए कि सुप्रीम कोट के दिशानिर्देशों के तहत हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता द्वारा वेतनमान बढ़ाने के लिए दिए गए प्रस्ताव पर पुनर्विचार कि या जाए। इसके बावजूद अब तक वेतनमान का पुनरीक्षण नहीं किया गया। इस पर अवमानना याचिकाएं दायर की गईं। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता शशांक शेखर व उपमहाधिवक्ता प्रवीण दुबे ने कोर्ट को बताया कि सरकार इन कर्मियों का वेतन बढ़ाना चाहती है। लेकिन जिस तरह की वृद्धि प्रस्तावित की गई, वह करना संभव नहीं है। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिए कि महाधिवक्ता, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जरनल, विधि व वित्त विभाग के सचिव अन्य अधिकारियों के साथ बैठक करें। बैठक में मप्र हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय के आधार पर विचार-विमर्श कर वेतन-भत्तों की समस्या का समाधान निकाला जाए।
Published on:
22 Aug 2019 07:59 pm
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