माता कत्यायनी के पूजन से प्रसन्न होते हैं भगवान श्रीकृष्ण
जबलपुर. हिन्दी पंचांग के सभी माहों में शीर्ष पर रहने वाले अगहन माह, जिसे मार्गशीर्ष मास भी कहा जाता है, 9 नवंबर से शुरू हो रहा है। शास्त्रों में भी इस मास में देवियों के पूजन, विधान का महत्व बताया गया है। श्रीकृष्ण को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए गोपियां माता कात्यायनी का व्रत रखकर पूजन करती हैं। इसी माह से हेमंत ऋतु का प्रवेश होता है। पूरे अगहन माह में व्रत त्यौहार व पूजन होंगे।
13 नवंबर से शुरू होगी अन्नपूर्णा पूजा
ज्योतिषाचार्य सचिन देव ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दूसरे दिन 9 नवंबर से मार्गशीर्ष मास (अगहन माह) लग जाएगा। 13 नवंबर को कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से मां अन्नपूर्णा का 16 दिवसीय व्रत शुरू होगा। इस व्रत को करने से घर-परिवार में धन-धान्य की वर्ष भर कमी नहीं होती। भंडार पर भी माता की कृपा बनी रहती है। इस दौरान शहर के निवाडग़ंज, गल्ला मंडी स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में आयोजन होते हैं।
दूर होती है विवाह में आने वाली बाधाएं
अगहन मास में भगवान श्रीकृष्ण को पाने और प्रसन्न करने की कामना से महिलाएं व्रत-पूजन करती हैं। ज्योतिषाचार्य सचिन देव के अनुसार इस व्रत को करने वाली नवयुवतियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। जिन युवतियों के विवाह में बाधाएं या अन्य कोई समस्या के कारण रुकावट आती है, उन्हें इस व्रत को अवश्य करना चाहिए। व्रत के दौरान माता कात्यायनी का पूजन किया जाता है। माता के पूजन से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं।
वृहस्पतिवार को पूजन से प्रसन्न होती हैं लक्ष्मी
मार्गशीर्ष मास में पडऩे वाले वृहस्पतिवार को माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है। व्रत पूजन करने वालों पर माता महालक्ष्मी की कृपा होती है। उन्हें धन-वैभव की कमी नहीं होती। इन्हीं खूबियों के चलते इस माह को मार्गशीर्ष माह के रूप में जाना जाता है।