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कुदरत का करिश्मा: नदी में कई झरने पर बाजू का कुआं ही प्यासा

बड़वारा तहसील के ग्राम रोहनिया कुडिय़ाघाट में प्रकृति के दो रूप, देखकर अचंभित रह जाते हैं लोग, नदी किनारे

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Prem Shankar Tiwari

Jan 01, 2017

Always remains dry well

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बालमीक पाण्डेय @ कटनी/जबलपुर। कुदरत के कुछ करिश्मे आदमी को हैरान कर देते हैं। इनके रहस्यों का जवाब शायद किसी के पास नहीं होता। कटनी जिले के बड़वारा के समीप रोहनिया गांव में ऐसा ही कुछ है जो लोगों को आश्चर्य में डाल देता है। यहां कल-कल कर बहती एक नदी में चट्टानों आते कई झरने गिर रहे हैं और नदी के ठीक समीप बना एक कुआं प्यासा है। इसमें पानी ही नहीं है। लोगों का कहना है कि आसपास मौजूद पानी व मौके की स्थिति के अनुसार कुएं को अपने आप भर जाना चाहिए था, लेकिन इसमें बूंद भर भी पानी नहीं रहता। प्रकृति के इस अजब रंग को देखने भारी संख्या में लोग रोहनियां पहुंचते हैं।


यह है पहुंच मार्ग
कटनी से पूर्व दिशा में करीब 25 किलोमीटर दूरी पर बड़वारा नगर बसा है। इससे दक्षिण की ओर बसाड़ी मार्ग पर करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम रोहनिया कुडिय़ा घाट नाम का रमणीक स्थान है। यहां प्रकृति अपने कई स्वरूपों में लोगों को रोमांचित करती है। यहां भगवान शंकर का सुंदर मंदिर बना हुआ है। यहां पर शिवजी के साथ हनुमानजी भी विराजे हैं। जहां पर प्रतिदिन लोगों का आना-जाना होता है।

हैरान करता है कुआं
मंदिर के समीप ही कुआं बना हुआ है। गांव के मुकुंदी रावत ने बताया कि यह कुआं काफी पुराना व गहरा है। इसमें कई वर्षों से अब पानी नहीं है। कितनी भी वर्षा हो, लेकिन कुएं में पानी टिकता ही नहीं। वर्षाकाल के कुछ ही दिनों बाद उसमें पानी खत्म हो जाता है। जबकि नदी से सटा हुआ है। नदी के कारण कुएं में पानी हमेशा रहना चाहिए बावजूद इसके पानी नहीं रहता।

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कई झरने करते हैं अचंभित
जहां पर कुआ बना हुआ है उसके ठीक सामने से कलकल निनाद करती हुई नदी प्रवाहित हो रही है। कुएं के सामने से नदी में कई झरने आकर मिलते हैं। चट्टानों से अविरल पानी नदी में टपक रहा है। यहां पर एक कुंड भी है। उसमें पानी रहता है, लेकिन कुएं में नहीं यह किसी आश्चर्य से कम नहीं। प्रकृति के इस अद्भुत नजारे को देखकर लोग अचंभित हो उठते हैं।

खत्म हो रहा अस्तित्व
हमेशा कुआं पानी से लबालब रहता था। कुएं में बढिय़ा जगत और फर्शीकरण कराया गया था। कुएं में पानी न होने के कारण उसका अस्तित्व समाप्ति की ओर है। कुआं पूरी तरह से झाड़-झंकाडिय़ों से घिर गया है। मकर संक्राति पर उक्त स्थल पर मेला महोत्सव के कारण सफाई का दौर जारी है। ग्रामीणों ने कुएं में पानी न रहने के संबंध में कई जानकारों से राय ली, लेकिन कोई पता नहीं चला। अब लोग उसे प्रकृति का आश्चर्य ही मानते हैं।

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