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सीकर। फतेहपुर कस्बे के रघुनाथपुरा इलाके में शुक्रवार को ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। अलसुबह एक के बाद एक चार अर्थियों को तैयार किया तो परिवार, रिश्तेदार व कॉलोनी के लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। मातम भरे माहौल में एक ही घर से सास व तीन बहुओं सहित चार अर्थियां एक साथ उठी। घर ही नहीं बल्कि कॉलोनी में चूल्हे नहीं जले। हर किसी की जुंबा पर सास-बहुओं की दुखांतिका में असामयिक मौत की बात चल रही थी। सदर थाना इलाके में तीन दिन पहले हुए सड़क हादसे में हुई सात महिलाओं की मौतों में से पांच महिलाओं का शुक्रवार को एक ही मोक्षधाम पर अंतिम संस्कार किया गया।
जानकारी के अनुसार मोहनी देवी के पांच बेटे व चार बेटियां हैं। पांचों बेटे संयुक्त परिवार के रूप में रहते थे। सास मोहनी देवी और उनकी तीन बहुओं बरखा देवी, तुलसी देवी एवं चंदा देवी की एक साथ अर्थीयां निकलीं। इसमें से बरखा देवी पत्नी ओमप्रकाश सैनी, तुलसी देवी पत्नी ललित सैनी सगी बहनें थीं और दोनों की एक साथ 25 मार्च 2002 में नवलगढ़ में शादी हुई थी। बरखा देवी के एक बेटा व दो बेटियां है। वहीं तुलसी देवी के एक बेटा व एक बेटी है।
घर में अलसुबह से ही सास व तीन बहुओं के पीहर पक्ष वाले, रिश्तेदारों के साथ ही कॉलोनी व आसपास के लोग एकत्रित होना शुरू हो गए थे। घर में चार अर्थियां एक साथ देख वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू नहीं रूक रहे थे। जब आखिरी बार परिवार व पीहर पक्ष के लोगों को सभी मृतकाओं का चेहरा दिखाए गए तो परिवार का हर सदस्य फफख पड़ा।
रूंधे गले से परिवार के लोग एक दूसरे को सांत्नवा दे रहे थे। शुक्रवार को मोहनी देवी, बरखा, तुलसी, आशा देवी का एक मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किया गया। जबकि इनकी रिश्तेदार चंदा देवी का अंतिम संस्कार फतेहपुर में ही दूसरे मोक्षधाम में किया गया। गौरतलब है कि दो दिन पहले सड़क हादसे में सात महिलाओं की मौत हो गई थी। इनमें से छह महिलाएं एक ही परिवार से थीं एवं एक महिला पड़ोसी थी।
मोहनी देवी के दो बेटे सऊदी अरब विदेश में रहते हैं इनमें से एक बेटा कुछ समय पहले आ गए थे लेकिन एक बेटा सऊदी में ही था, उनके आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया गया। हादसे की सूचना मिलने के बाद दोनों बेटों को विदेश से बुलवाया गया। दोनों बेटों की पत्नियों की भी हादसे में मौत हो गई थी। शुक्रवार को मोहनी देवी, बरखा, तुलसी एवं चंदा देवी की अर्थियां एक साथ उठाई गई। श्मशान खाट पर चारों की चिताएं एक साथ लगाई गई। चारों को मुखाग्नि दी गई तो परिवार के लोग अपने आप को संभाल नहीं पाएं। अंतिम संस्कार में आए लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि परिवार के सदस्यों को एक साथ सफर नहीं करना चाहिए।
Updated on:
16 Jan 2026 08:14 pm
Published on:
16 Jan 2026 08:07 pm

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