जबलपुर। पैरों में घुंघरू और पारंपरिक वेश-भूषा, अपनी धुन में मदमस्त होकर नाचते अहीर। गीतों की धुन ऐसी कि सुनने वाले भी थिरकने से खुद को न रोक सकें। अहीर नृत्य की परंपरा कब शुरू हुई ये कोई नही बता पाता। लेकिन आज भी इसे परंपरागत रूप से वैसे ही देखने मिलता है जैसे बरसों पहले।