
सीताफल में छिपे हैं चमत्कारी तत्व
जबलपुर। शरद ऋतु की दस्तक के साथ सीताफल बाजार में आ गया है। इस मौसमी फल के जायके का दौर भी चल रहा है। हालांकि कुछ लोग देशी या सामान्य फल समझकर सीताफल का अवाइड भी करते हैं, लेकिन डायटीशिन्यस इसे चमत्कारी फल मानते हैं। डायटीशियन डॉ. पल्लवी शुक्ल का कहना है कि शरीफा या सीताफल बेहद गुणकारी फल हैा इसमें ढेरों पौष्टिक तत्व हैं। सुबह-सुबह खाया गया एक सीताफल न केवल आपके शरीर में कैलोरी की कमी की भरपाई कर देता है, बल्कि दिन भर के लिए शरीर में नई स्फूर्ति भी प्रदान करता है। यह एक दवा का काम भी करता है। इसके सेवन से कई रोग छूमंतर हो जाते हैं। आइए आपको बताते हैं कि सीताफल किन-किन रोगों में रामबाण का काम करता है।
हैं कई पोषक तत्व
सीताफल आयुर्वेद में एक औषधि के रूप में शामिल है। पकी हुई अवस्था में यह बहार से सख्त और अंदर से नरम और बहुत ही मीठा होता है । इसका अंदर का क्रीम सफ़ेद रंग का और मलाईदार होता है । इसके बीज काले रंग के होते है ।बजार में आजकल सीताफल की बासुंदी शेक और आइसक्रीम भी मिलते है । यह हमारी सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है । इसमें कई विटामिन्स होते हैं। इसमें नियासिन विटामिन ए राइबोफ्लेविन थियामिन आदि तत्व होते हैं। इसके इस्तेमाल से हमें आयरन, कैल्शियम, मॅग्नीज, मैग्नेशियम, पोटैशियम और फोस्फरस मिलते हैं। सीता फल में आयरन अधिक मात्रा में होता है, जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक है। इसके अन्दर मौजूद पोटैशियम और मैग्नेशियम ह्रदय के लिए बेहद फायदेमंद हैं। मैग्नेशियम शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। इसमें फाइबर की प्रचुर मात्रा ब्लड प्रेसर को नियंत्रित करती है। इससे कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है ।
सीता ने किया था भेंट
शास्त्रों के जानकार पं. रामसंकोची गौतम के अनुसार सीताफल के नाम से एक युगों पुराना वृतांत भी जुड़ा है। माना जाता है कि वनवास के समय माता सीता ने यह फल भगवान श्रीराम को भेंट किया था। इसकी वजह से इस फल का नाम सीता फल हुआ। यह बहुत शीतल होता है, इसलिए भी इसे सीतफल भी कहते हैं। आयुर्वेद में बताए गए गुणों के अनुसार इस फल का सेवन इंसान को करीब एक दर्जन बीमारियों से बचाता है और चुस्त दुरुस्त रखता है। हम आपको बता रहे हैं कि कौन से रोगों में यह फायदेमंद है।
ये हैं औषधीय उपचार
- आज के समय में बाल सफेद होना, झडऩा या गंजापन आम बीमारी बन चुका है। इस समस्या से दुनिया में ज्यादातर लोग जूझ रहे हैं। इसके बीज बकरी के दूध में घिसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।
- यह फल पित्तशामक, तृषाशामक, उल्टी रोकने वाला, पौष्टिक, तृप्तिकर्ता, कफ एवं वीर्यवर्धक, मांस एवं रक्त वर्धक, बलवर्धक, वात दोष शामक और हृदय के लिए लाभकारी है।
- कच्चा सीताफल खाने से अतिसार और पेचिश में फायदा मिलता है। कच्चे सीताफल को काटकर सुखा दें और पीसकर रोगी खिलाएं। इससे डायरिया दूर हो जाता है।
- इस फल को खाने से दुर्बलता दूर होकर मैन पावर बढ़ती है। थकान दूर होकर मांस-पेशियां मजबूत होती हंै।
- सीताफल एक मीठा फल है जिसमें कैलोरी काफी मात्रा में होती है। यह फल आसानी से पचने वाला और अल्सर तथा एसिडटी में लाभकारी है।
- सीताफल के पत्तों को पीस कर फोड़ों पर लगाने से वो ठीक हो जाते हैं।
- सीताफल घबराहट दूर कर हार्ट बीट को सही करता है। कमजोर हृदय या उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए इसका सेवन बहुत ही लाभदायक है।
- सीताफल में विटामिन सी ,ए है जो की स्वस्थ त्वचा, बेहतर दृष्टि और स्वस्थ बालों के लिए उत्तम है।
- इसमें मैग्नीशियम है विटामिन बी 6 और पोटेशियम भारी मात्रा में होता है, जो शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
- सीताफल के पेड़ की छाल मे जो स्तंभक और टैनिन होता है वह दवाएं बनाने में प्रयोग किया जाता है। इसके पेड़ के पत्तों को कैंसर और ट्यूमर जैसी बीमारी के उपचार के लिए अच्छा माना जाता हैं। इसकी छाल मसूड़ों और दांतों के दर्द को कम कर करने में इस्तेमाल की जाती है।
- कई लोग इसे गर्भावस्था के समय का चमत्कारी फल कहते हैं जो मॉर्निंग सिकनेस, मतली, चिड़चिड़ेपन और स्वभाव में अचानक परिवर्तन की समस्या से लडऩे में सहायक होता है। बच्चे के जन्म के बाद माँ के स्तनों में दूध का अधिक उत्पादन करने में भी सीताफल सक्षम होता है।
Published on:
29 Oct 2017 03:44 pm
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