2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Tourism: रामायण से पहले का है ये नेशनल पार्क, जुड़े हैं रोचक तथ्य…

मध्यप्रदेश के मंडला जिले और बालाघाट से लगे हुए कान्हा नेशनल पार्क की सैर आपके लिए अविस्मरणीय हो सकती है।

2 min read
Google source verification

image

Abha Sen

Mar 25, 2016

kanha kisli national park

kanha kisli national park

जबलपुर। अब तक आपने अनेक नेशनल पार्क देखे व घूमे होंगे। उनकी रोचक कहानियों के बारे में भी सुना होगा, लेकिन आज आपको ऐसे राष्ट्रीय उद्यान के संबंध में बता रहे हैं, जिसका इतिहास ना सिर्फ भगवान श्रीराम के पिता दशरथ से जुड़ा है, बल्कि इसके रोचक तथ्य आपको आश्चर्यचकित कर देंगे। मध्यप्रदेश के मंडला जिले और बालाघाट से लगे हुए कान्हा नेशनल पार्क की सैर आपके लिए अविस्मरणीय हो सकती है।

कान्हा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व 1973 में इसके वर्तमान स्वरूप और आकार के साथ अस्तित्व में आया था, लेकिन इसका इतिहास महाकाव्य रामायण के समय से पहले का हैं। बताया जाता है कि अयोध्या के महाराज दशरथ ने कान्हा में स्थित श्रवण ताल में ही श्रवण कुमार को हिरण समझ के मार दिया था तथा श्रवण कुमार का अंतिम संस्कार श्रवण चित्ता में हुआ था।

kanha kisli national park

ऋषि कण्व और कालिदास
भारत में सबसे पुराने अभयारण्य में से एक, इस क्षेत्र में पायी जाने वाली काला उपजाऊ मिट्टी जिसे स्थानीय भाषा में कनहार के नाम से जाना जाता है के कारण इस वन क्षेत्र का नाम कान्हा पड़ा। एक अन्य प्रचलित लोक गाथा के अनुसार कवि कालिदास जी द्वारा रचित अभिज्ञान शाकुंतलम में वर्णित ऋषि कण्व यहां के निवासी थे तथा उनके नाम पर इस क्षेत्र का नाम कान्हा पड़ा।

राजा-रानी का पेड़
कान्हा में हमें बाघों व अन्य वन्य जीवों के अलावा पृथ्वी पर सबसे दुर्लभ हिरण प्रजातियों में से एक बारहसिंगा (दलदली हिरण) को भी देखने का मौका मिलता हैं। पार्क में आगंतुकों के केन्द्र के नजदीक साल के पेड़ों के दो विशाल ठूठों को देखा जा सकता है। इन ठूठों की प्रतिदिन जंगल में पूजा की जाती है। इन्हें राजा-रानी नाम से जाना जाता है।

kanha kisli national park

इनके बीच प्रसिद्ध
मूलत: बैगा और गोंड आदिवासी इस वन क्षेत्र में स्थानांतरण कृषि और वन उपज एकत्र कर अपनी जीविका का पालन करते थे। कान्हा नेशनल पार्क पर्यटकों, प्राकृतिक इतिहास, वन्य जीव, फोटोग्राफरों, बाघ और वन्यजीव प्रेमियों के साथ साधारण जनता के बीच बड़े पैमाने पर प्रसिद्ध है। यहां घूमने के लिए हर साल देशी के साथ ही विदेशी पर्यटक भी आते हैं।

ये भी पढ़ें

image
Story Loader