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बाइकर्स ने किया पिता का मर्डर फिर सीसीटीवी कैमरे में सामने आई बेटे की ये करतूत

माढ़ोताल में गोली मारकर प्रौढ़ की हत्या के केस में आया हैरान कर देने वाला मोड़

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amazing mystery of murder

गोली मारकर हत्या के केस में आया हैरान कर देने वाला मोड़

जबलपुर। माढ़ोताल थाना क्षेत्र में अंतर्गत आकाश विहार में बुधवार देर रात प्रौढ़ की गोली मारकर हत्या के राज से पर्दा उठ गया है। सीसीटीवी कैमरों में पड़ताल के बाद इसमें जो सच सामने आया उसे सुनकर पुलिस अफसर भी हैरान रह गए। दरअसल पूछताछ में यह बात सामने आयी कि पूरे घटनाक्रम का सूत्रधार मृतक का अपना बेटा ललित अहिरवार ही है। उसने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हत्या के प्रयास के मामले में फंसाने के इरादे से अपने ही घर पर गोलियां चलवा दीं। इसमें उसके पिता अशोक अहिरवार (48) की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या में शामिल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य सूत्रधार ललित फरार हो गया है।

ये है मामला
पुलिस के अनुसार ललित ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि राजीव गांधी आकाश विहार गली नम्बर एक निवासी उसके पिता अशोक अहिरवार (48), मां मीराबाई, बहन लक्ष्मी और वह खुद बुधवार की रात छत पर सो रहे थे। बड़ा भाई दिलीप और मझला भाई मोनू नीचे कमरे में सो रहे थे। रात करीब डेढ़ बजे दरवाजे पर पत्थर पटकने की आवाज सुनकर पिता अशोक ने दरवाजा खोला, तभी अज्ञात बाइकर्स ने उन पर दनादन गोलियां चला दीं। एक गोली दरवाजा चीरते हुए निकल गई, जबकि दूसरी अशोक के सीने में लगी। पिता को गिरता देख दिलीप बाहर आया, तो उसे बाइक पर दो लोग भागते नजर आए। मोहल्ले की छोटी रैकवार ने भी बदमाशों को भागते देखा। फायरिंग की आवाज सुनकर मोहल्ले के लोग पहुंच गए। अशोक को परिजन मेडिकल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पुलिस को बताई ये कहानी
अशोक के छोटे बेटे ललित ने पुलिस को बताया था कि बुधवार दोपहर थाने के पास स्थित शैलू की चाय की दुकान पर उसका बजरंग नगर निवासी मानस उपाध्याय और करमेता निवासी मिंटू व चिंटू चौबे से विवाद हुआ था। पुलिस सूत्रों के अनुसार ललित ने दोस्त ऋषभ यादव को घटना के बारे में बताया था। इसे लेकर उनका मिंटू, चिंटू और मानस से रात में भी विवाद हुआ था। उसने संदेह व्यक्त किया था कि मानस, मिंटू और उसके साथियों ने ही उसके पिता की हत्या की है।

किया था ***** जाम
उल्लेखनीय है कि पोस्टमार्टम व अन्य कार्रवाई के बाद गुरुवार दोपहर 12 बजे पुलिस ने अशोक का शव परिजन के सुपुर्द किया। इसके बाद परिजन शव लेकर चुंगीनाका पहुंचे और ***** जाम कर दिया। आक्रोशित परिजन और मोहल्ले वाले सुबह से ही थाने के सामने जमा हो गए थे। प्रदर्शन के दौरान मृतक अशोक की मां रानीबाई को महिला एसआइ सरिता पटले ने थप्पड़ जड़ दिया। यह देखभीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस से झूमाझटकी करने लगी। गुस्साई भीड़ एसआइ के निलम्बन की मांग पर अड़ गई। पुलिस अधिकारियों के माफी मांगने और एसआइ के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद भीड़ शांत हुई। ***** जाम से वाहनों की लम्बी कतार लग गई। मौके पर सीएसपी अधारताल, एएसपी उत्तर, विजयनगर, गोहलपुर, अधारताल और कंट्रोल रूम से बल पहुंच गया था।

अब आया ये सच
पुलिस ने सघनता से मामले की पड़ताल शुरू की। अधिकारियों को मृतक अशोक के बेटे ललित पर ही संदेह हुआ। वह बार-बार बयान बदल रहा था और उसका निशाना सीधे तौर पर मानस उपाध्याय, मिंटू व अन्य साथी थे। पुलिस ने क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। उनकी जांच की इसमें ज्ञात हुआ कि मानस, मिंटू व अन्य लोग उस रात इस तरफ नजर ही नहीं आए। संभवत: उस रात वे घर पर ही सो रहे थे। फायरिंग करने वाले कोई और थे। उनके हावभाव सामान्य थे। पुलिस ने संदेह के आधार पर जब ललित से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने पूरा सच उगल दिया। उसने बताया कि मानस, मिंटू व चिंटू आदि से उसकी पुरानी दुश्मनी है। दोपहर में चाय की दुकान पर हुए विवाद के बाद वह उन्हें हत्या के प्रयास के मामले में फंसाना चाहता था। इसी के तहत उसने अपने दोस्तों को तैयार किया वे रात को उसके यानी ललित के घर पर फायरिंग करें। इसका आरोप मानस, मिंटू, चिंटू आदि के सिर पर मढ़ दिया जाएगा।


ये है फसाद की वजह
पुलिस कंट्रोल रूम में एएसपी उत्तर व एएसपी क्राइम की मौजूदगी में हत्या का खुलासा करते हुए टीआई एनके पांडे ने बताया कि अशोक अहिरवार की हत्या मामले में संदेही मानस उपाध्याय, मिंटू व चिंटू चौबे घटना के बाद घर में सोते हुए मिले थे। पूछताछ के दौरान तीनों ने बताया कि 23 अक्टूबर 2017 में फुहारा के पास सुहागी अधारताल निवासी आकाश दुबे पर चाकू से वार कर हत्या का प्रयास किया गया था। मामले में माढ़ोताल व दमोहनाका निवासी अनमोल जैन, अनिकेत भट्ट, अभि अहिरवार, मनीष अहिरवार, मोहित विश्वकर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कुछ दिन पहले ही वे जमानत पर छूटे हैं। मोहित व मनीष मृतक अशोक के बेटे ललित अहिरवार के अभिन्न मित्र हैं। सभी मिलकर चौबे भाइर्यों व मानस पर समझौता का दबाव बना रहे थे और न मानने पर झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकी दी थी। इसी के तहत उन्होंने मानस व अन्य का फंसाने की साजिश रची थी, लेकिन सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए चेहरों के आगे पूरी सच्चाई सामने आ गई। पुलिस ने अनमोल, अनिकेत, मनीष, मोहित सेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक का बेटा ललित फरार है।