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amazing: एशिया में सबसे उपजाऊ शहपुरा, पाटन के खेत

धान, गेहूं, मटर के उत्पादन के मामले में सबसे आगे, जबर्दस्त उर्वरा शक्ति, मृदा में मौजूद हैं तमाम पोषक तत्व

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Lali Kosta

Mar 24, 2016

amazing: Shahpura and Patan farms most fertile in

amazing: Shahpura and Patan farms most fertile in the Asia

जबलपुर। मेहनतकश किसान, उपजाऊ काली मिट्टी युक्त खेतों में पसीना बहाकर फसलों के जबर्दस्त उत्पादन का रिकार्ड बना रहे हैं। पाटन और शहपुरा के खेतों की उर्वरा शक्ति बेमिसाल है। विशेषज्ञों के अनुसार ये खेत एशिया के सबसे उपजाऊ खेतों में शुमार हैं। इस जमीन की मृदा में मौजूद पोषक तत्वों के आंकड़े व फसलों के उत्पादन का रिकार्ड भी इस बात की पुष्टि कर रहा है। अब तक हुए मृदा परीक्षणों में यहां की जमीन को मालवा, खंडवा, खरगौन, रेहली व महाराष्ट्र की जमीन से भी ज्यादा उपजाऊ पाया गया है। यहां की मृदा में रासायनिक गुण(औसतन), कई खेतों की मृदा में कारकों की मौजूदगी इससे भी बेहतर-

मृदा के कारक, प्राप्त मात्रा
पीएच, 7.5,
विद्युत चालकता, 0.20,
आर्गेनिक कार्बन, 0.80 से 1 तक,
उपलब्ध नत्रजन, 143 वीएल,
उपलब्ध स्फु र, 2.66 वीएल,
उपलब्ध पोटाश, 112 वीएल,
गंधक, पीपीएम में सामान्य
जस्ता, पीपीएम में सामान्य
आयरन, सामान्य
तांबा, मध्यम
मैगनीज, पर्याप्त

प्रति एकड़ फसलों का उत्पादन
धान, 51 क्विंटल तक(पिछले साल गडऱ पिपरिया के किसान नरेन्द्र पटैल के खेत में)
गेहूं, 25 क्विंटल तक
मटर, 50 क्विंटल तक फल्ली
तुअर, 10 क्विंटल
मक्का, 22 क्विंटल
मूंग, 7 क्विंटल तक
गन्ना- 500 क्विंटल तक

amazing: Shahpura and Patan farms most fertile in

अच्छे उत्पादन के ये भी कारण
-जागरूक हैं किसान
-अपनाते हैं क्राप रोटेशन प्रक्रिया
-उपजाऊ काली मिट्टी
-बीजोपचार करके बुवाई
-अच्छी गुणवत्ता की दवाईयां व उर्वरकों का उपयोग

शहपुरा और पाटन क्षेत्र की मिट्टी काली व उपजाऊ है। यहां की मृदा में पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं, इतना ही नहीं यहां के किसान खेती की आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर फसलों का अधिकतम उत्पादन कर रहे हैं। मृदा में पोषक तत्वों की मौजूदगी का का आंकलन व फसलों के उत्पादन के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि यहां के खेत एशिया के सबसे उपजाऊ खेतों में शामिल हैं।
शेखर सिंह बघेल, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय

शहपुरा व पाटन के किसान जितने आधुनिक हैं वे उतने ही खेती की पुरानी परंपरा को लेकर जागरूक भी हैं। खेतों में गोबर की खाद का उपयोग करते हैं, फसलों के रोटेशन की प्रक्रिया अपनाते हैं। इसीलिए फसलों का अच्छा उत्पादन मिल रहा है।
रजनीश दुबे, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी

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