जबलपुर। मेहनतकश किसान, उपजाऊ काली मिट्टी युक्त खेतों में पसीना बहाकर फसलों के जबर्दस्त उत्पादन का रिकार्ड बना रहे हैं। पाटन और शहपुरा के खेतों की उर्वरा शक्ति बेमिसाल है। विशेषज्ञों के अनुसार ये खेत एशिया के सबसे उपजाऊ खेतों में शुमार हैं। इस जमीन की मृदा में मौजूद पोषक तत्वों के आंकड़े व फसलों के उत्पादन का रिकार्ड भी इस बात की पुष्टि कर रहा है। अब तक हुए मृदा परीक्षणों में यहां की जमीन को मालवा, खंडवा, खरगौन, रेहली व महाराष्ट्र की जमीन से भी ज्यादा उपजाऊ पाया गया है। यहां की मृदा में रासायनिक गुण(औसतन), कई खेतों की मृदा में कारकों की मौजूदगी इससे भी बेहतर-