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एन्करेज यंग राइटर्स डे : इस शहर के युवाओं को लुभा गई लेखन की दुनिया

शब्दों से हुआ प्रेम तो खो गए शब्दों की दुनिया में

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जबलपुर। शब्दों से प्रेम बेहद कम लोगों को होता है, लेकिन जिसे होता है वह इस शब्दों की दुनिया में खो जाता है। साहित्य की दुनिया को चाहने वाले अपनी एक अलग ही दुनिया में जीना पसंद करते हैं। ऐसी ही लेखन की दुनिया में शहर के कई ऐसे युवा हैं जो कि डूब चुके हैं। लेखन के क्षेत्र में यह खुद को अलग मुकाम पर हासिल करना चाहते हैं, जहां सिर्फ इनके नाम का चलन हो। इस एन्करेज यंग राइटर्स डे के मौके पर आइए मिलते हैं शहर के कुछ ऐसे ही युवाओं से जो लेखन के क्षेत्र में खुद को समर्पित कर चुके हैं।

सोशल मीडिया पर मिल रहा प्लेटफॉर्म
सोशल मीडिया उन लोगों को लिए शेयरिंग का एक जबर्दस्त माध्यम बन चुका है, जो कि लेखन के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वे अपनी कविताओं को वाट्सएप, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया के माध्यमों में लिखकर दोस्तों के बीच शेयर करना पसंद कर रहे हैं। नवोदित लेखकों का कहना है कि यह एक बहुत अच्छा जरिया है, जहां अपनी रचनाओं को लोगों की तुरंत प्रतिक्रिया को जानने के लिए पोस्ट किया जा सकता है।

नाइंथ क्लास से शुरुआत
शुभम अर्पित कहते हैं कि लेखन उनके लिए सबकुछ है। नाइंथ क्लास से ही वे कविताएं लिख रहे हैं। इसमें उनके पिताजी प्रेरणास्रोत रहे हैं। शुभम बताते हैं कि उन्होंने अब तक कुछ कविताओं को लिखने के साथ-साथ नाटक और शॉर्ट फिल्मों की स्क्रिप्ट भी लिखी हैं। वे कहते हैं कि लेखन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना काफी मुश्किल है, लेकिन मुश्किल टास्क को करना ही जीवन जीने की कला है। शुभम ने कहा कि आगामी दिनों में खुद के लिखे हुए नाटकों के मंचन पर काम करना चाहते हैं।

उम्र कम थी, लेकिन इश्क पर लिखा
आदर्श दुबे महज 17 वर्ष की उम्र में यंगेस्ट गजल राइटर होने का खिताब जीत चुके हैं। आदर्श बताते हैं स्कूल के वक्त से ही शब्दों से प्यार हो चुका है। अक्सर कॉपीज में जब कविताएं लिखता था जो टीचर्स को हैरानी होती थी कि इतनी कम उम्र में कोई प्यार और मोहब्बत के शब्दों को कविताएं कैसे संजो सकता है। क्लास बढ़ती गई तो कविता लेखन के प्रति रूचि भी बढ़ती गई। आदर्श कहते हैं उन्होंने आगे जाकर गजल संग्रह तैयार किया, जिसके लिए उन्हें अवॉर्ड मिला।

नए लेखकों के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म
वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. राजेन्द्र तिवारी ऋषि कहते हैं कि लेखन की दुनिया काफी व्यापक है। इसमें जुडऩे के बाद सीखना कभी खत्म नहीं होता है, क्योंकि हर शब्द और हर रचना अपको नया सिखाती है। नए लेखकों के लिए एक प्लेटफॉर्म दिया जाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही यह भेदभाव भी खत्म करना होगा कि वरिष्ठ साहित्यकार किसी नवोदित को नहीं सिखाएगा, वहीं नवोदित यह न समझे कि दो चार रचनाएं लिखने के बाद वह अच्छा लेखक बन चुका है। अच्छे लेखन के लिए ऐसी वर्कशॉप होनी चाहिए, जहां हर वर्ग का भेदभाव खत्म हो सके।