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heart attack treatment यहां होती है देश में सबसे सस्ती एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, कुछ हजार रुपए में ठीक हो जाता है मरीज

यहां होती है देश में सबसे सस्ती एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, कुछ हजार रुपए में ठीक हो जाता है मरीज  

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यहां होती है देश में सबसे सस्ती एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, कुछ हजार रुपए में ठीक हो जाता है मरीज

जबलपुर. नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी की शुरुआत के साथ ही मरीजों की संख्या बढ़ गई है। यहां की कैथ लैब में 10 दिन में पचास से ज्यादा केस हो चुके हैं। हॉस्पिटल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के साथ ही एडवांस मशीनों की उपलब्धता से हृदय सम्बंधी बीमारियों के बेहतर उपचार की सुविधा मेडिकल कॉलेज में मुहैया हो गई है। ओपन हार्ट सर्जरी और पेस मेकर लगवाने के लिए अब पीडि़तों को निजी अस्पतालों और दूसरे शहरों तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। ये दोनों सुविधाएं अगले चरण में शुरूहो जाएंगी।

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का मामला
एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी शुरू होते ही बढ़े मरीज, 10 दिन में 50 केस

वॉल्व रिप्लेसमेंट, बायपास सर्जरी शुरू - हॉस्पिटल में वॉल्व रिप्लेसमेंट और बायपास सर्जरी की शुरुआत हो चुकी है। मेडिकल अस्पताल में हृदय विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी थी। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मरीज की बायपास सर्जरी की जा चुकी है। वॉल्व बदलने के लिए सर्जरी की शुरुआत हो गई है। कार्डियोलॉजी में प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित किनरे और असिसटेंट प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा के अनुसार हॉस्पिटल में अंचल की सबसे आधुनिक मशीनें हैं।

विदेश से आई मशीनों ने बढ़ाई सुविधा

इलेक्ट्रो फिजियोलॉजी- एब्लेशन मशीन इंस्टॉल की गई है। इसके जरिए मरीज के दिल की धडकऩ बढऩे पर, वह कहां से बढ़ रही यह आसानी से पता चल जाता है। जापान की इस आधुनिक मशीन से वेव के जरिए मरीज की स्थिति जांच ली जाती है।

फ्लैट पैनल: एक बड़ा टीवी स्क्रीन जैसा सिस्टम है। इस स्क्रीन पर किसी चित्र को बड़ा-छोटा करके आंतरिक बनावट को और अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। पहले तीन-चार कम्प्यूटर पर स्क्रीन पर अलग-अलग चित्र देखते हैं। फ्लैट पैनल पर सभी चित्र एक साथ देखे जा सकते हैं।

ओसीटी- इस उपकरण के जरिए नस के अंदर जाकर उसकी स्थिति का बेहतर अंदाजा लिया जा सकता है। नस के अंदर कैथेटर डालकर लाइट रिफ्लेक्शन के जरिए स्थिति पता कर ली जाती है।

एफएफआर - इस तकनीके के जरिए नस में ब्लॉकेज के पहले और बाद में दबाव के अंतर की जानकारी ली जाती है। उपकरण की सहायता ब्लॉकेज की तीव्रता का अंदाजा पता चल जाता है।

सात करोड़ की मशीन- कैथ लैब में एंजियोग्राफी के लिए कोरिया से आधुनिक मशीन गई है। इससे एंजियोग्राफी (हृदय की नसों की जांच) करने पर अपेक्षाकृत बेहतर और स्पष्ट परिणाम है।

हृदय रोगियों की जांच के लिए आधुनिक कैथ लैब है। ईको, एंजियोग्राफी सहित सभी प्रकार की जांच शुरू हो गई है। मरीजों की एंजियोप्लास्टी भी शुरु कर दी गई है।
डॉ. वायआर यादव, डायरेक्टर, सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल