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#AnimalHusbandry में डिग्री और डिप्लोमा से बना सकते हैं फुल टाइम कॅरियर

पशुपालन और वेटरनरी की अन्य फील्ड में भी मौका

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Animal Husbandry

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जबलपुर. 12 वीं के बाद बहुत से स्टूडेंट्स ये तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे किस फील्ड को चुनें और किसे छोड़ें। भले ही नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया हो,लेकिन अब भी बहुत से स्टूडेंट्स अच्छे कॅरियर को लेकर सोच में पड़े हैं। बहुत से नीट, जेईई समेत अन्य एग्जाम क्लियर डॉक्टर, इंजीनियर्स बनना चाहते हैं। लेकिन जिन स्टूडेंट्स को एनिमल हसबेंडरी में दिलचस्पी है, वे इस फील्ड में कॅरियर बना सकते हैं। ये क्षेत्र कभी बंद न होने वाला है, जिसकी आवश्यकता दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। ग्रेजुएशन स्तर ऐसे कोर्सेज हैं जो कॅरियर को नई दिशा दे सकते हैं।

IMAGE CREDIT: patrika

बीवीएससी एंड एएच
यह पांच साल का डिग्री कोर्स है। इसके लिए बारहवी बायोसाइंस से पास होना जरूरी है। एडमिशन के लिए प्री. वेटरनरी एंड फिशरी टेस्ट में शामिल होना चरूरी है। इसकी पढ़ाई जबलपुर, रीवा और महू के वेटरनरी कॉलेजों में कराई जाती है।

एडीडीईटी
यह दो साल का डिप्लोमा कोर्स है। जिसके लिये एडीडीईटी (एनीमल हसबेंडरी एंड डेयरी टेक्नोलॉजी डिप्लोमा इंटेरेंस टेस्ट)में सफल होना जरूरी है। जिसके बाद जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर, महू, रीवा, मुरैना, भिंड, इंदौर के गवर्नमेंट एवं प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन ले सकते हैं।

बिना डिग्री के मिलती है ट्रेनिंग
एनिमल हसबेंडरी में बिना डिग्री के भी स्टूडेंट्स फुल एवं पार्ट टाइम जुड़कर काम कर सकते हैं। इनमें गोसेवक व मैत्री बनना है। जो कि दसवीं पास करने के बाद ग्राम पंचायत में नियुक्त किया जाता है, यह 6 महीने कार प्रशिक्षण प्रोग्राम है। दोनों कोर्स में पशुओं के पालन, देखरेख से लेकर कृत्रिम गर्भाधान आदि से संबंधित जानकारियां दी जाती हैं। जिन्हें सीखने के बाद कोई भी अपना काम शुरू कर सकता है। प्रशिक्षण के दौरान मानदेय का भी प्रावधान है एवं प्रशिक्षण के बाद प्राथमिक उपचार से संबंधित मेडिकल किट पशुपालन विभाग द्वारा दी जाती है।
- डॉ. श्रद्धा श्रीवास्तव, शास. वेटरनरी सर्जन, जबलपुर