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जबलपुर। भारत में अब तक जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में परम्परागत सेव की खेती हो रही है, किन्तु वैज्ञानिक तकनीक के जरिये अब मैदानी क्षेत्रों में भी सेव की खेती सम्भव हो गई है। कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, हरियाणा व पंजाब में यह खेती सफलतापूर्वक शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश में भी इसकी असीम सम्भावनाएं हैं।
नावाचार - कृषि विवि के जवाहर मॉडल में सेव की किस्म हरिमन-99 का पौधा किया रोपित
अब जबलपुर में सेव की खेती की सम्भावनाएं तलाशेगा कृषि विवि
इसे देखते हुए कृषि विवि ने जबलपुर में भी सेव की खेती की सम्भावनाओं की तलाश शुरू की गई है। कृषि विश्वविद्यालय के जवाहर मॉडल प्रक्षेत्र में कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन एवं प्रबंध मंडल सदस्य डॉ. ब्रजेशदत्त अरजरिया ने सेव की किस्म हरिमन -99 का रोपण किया। इस मौके पर अनुसंधान सेवाएं डॉ. पीके मिश्रा, डॉ. धीरेन्द्र खरे, कुलसचिव रेवासिंह सिसोदिया, डॉ. डीके पहलवान, डॉ. दिनकर शर्मा, डॉ. एमए खान आदि उपस्थित थे।
पहली बार अनुसंधान
डॉ. बिसेन ने कहा कि जवाहर मॉडल के तहत जबलपुर तथा आसपास के जिलों में सेव की खेती की सम्भावनाओं को प्रथम बार अनुसंधान के तहत लिया गया है। इससे कृषि में विविधता एवं आय बढऩे की सम्भावनाओं का परीक्षण किया जाएगा। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मोनी थामस ने बताया कि फसलों की सघनता एवं विविधता ही एक मात्र सफल एवं सतत् कृषि प्रणाली की रणनीति हो सकती है। यह सीमित संसाधन लघु एवं सीमान्त कृषकों की आय में वृद्धि एवं निरंतरता के साथ रोजगार सृजन बनाए रख सकती है।
Published on:
06 Jan 2021 05:00 pm
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