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मिक्स मीडिया के साथ पेंटिंग को नया आयाम दे रहे इस शहर के कलाकार

स्कल्पचर और पेंटिंग में धागे बने अभिव्यक्ति का नया माध्यम

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Painting

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जबलपुर। अक्सर कहा जाता है कि रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं होती। यह ऐसी फील्ड है, जिसमें कलाकार किसी भी मामूली चीज को कला में बदल सकता है। आर्ट और आर्टिस्ट की क्रिएटिविटी किसी भी चीज को कलात्मक आकार दे सकती है। कुछ ऐसा ही कर रही हैं हमारे शहर की कुछ कलाकार। यह सभी फाइन आर्ट में प्रशिक्षित हैं, लेकिन इन्होंने पेंटिंग को केवल रंग और ब्रश तक सीमित न रख कर मिक्स मीडिया के साथ नया आयाम दे दिया है।

मिट्टी और धागों की जुगलबंदी
गौरी दुबे फाइन आर्ट एक्सपर्ड हैं। कैनवास पेंटिंग उनकी कल्पनाशक्ति और क्रिएटिविटी के लिए नाकाफी है, इसलिए उन्होंने कुछ नए मीडियम में काम करना शुरू किया। वे टेराकोटा में काम करती हैं, पॉटरी करती है और अब उन्होंने मिट्टी के स्कल्पचर्स को धागों के साथ गूंथना शुरू किया है। ऐसा लगता है जैसे वे मिट्टी के शिल्प को धागे के साथ सिल रही हों। शिल्प के किनारे पर वे बारीक सूराख कर देती हैं ताकि उनमें धागे डाले जा सकें। वे धागों को गूंथने के लिए कई आकार की सुइयों और क्रोशिया की मदद लेती हैं। भारती बताती हैं कि उन्हें आदिवासी लोककला गौंड आर्ट में दिलचस्पी है और इस आर्ट पर थीसिस भी लिखी है। गौंड आर्ट के बारीक डॉट्स उनकी प्रेरणा है। इसलिए शुरुआत में वे कैनवास पेंटिंग के साथ सिलाई के जरिए बारीक डॉट्स की लाइन बनाया करती थीं। यह उन्होंने खुद ही सीखा था। बचपन से कढ़ाई का शौक भी था इसलिए धागों के साथ एक्सपेरिमेंट करना और भी आसान हो गया।

कान्सेप्ट को सपोर्ट करता है धागा
फाइन आट्र्स छात्रा तृप्ती ने बताया कि मै जब कुछ नए माध्यमों के साथ एक्सपेरिमेंट कर रहीं थी तब महसूस हुआ कि धागे मेरी कंसेप्ट को सबसे ज्यादा सपोर्ट कर रहे हैं। इन दिनों मैं पूजा, मंदिर आदि पर एक सीरीज रच रही हूं जिसमें मैने पैंटिंग के साथ धागों का इस्तेमाल किया है। मैने ऊन भी इस्तेमाल किया है। एक एग्जीबिशन में उनकी हरे रंग के बैकग्राउंड पर धागों के साथ बनी कृति ने दर्शकों का ध्यान खींचा था। जिसके लिए उन्हें खूब तारीफ भी मिली। अब वे नए लोगों इसकी जानकारी दे रहीं हैं।

पेंटिंग के साथ धागा हो जाता है मर्ज
पेटिंग के साथ धागे के प्रयोग को लेकर सभी लोगों की अपनी राय है। शिल्पा बताती हैं कि पहले पेंटिंग में आसपास धागे से आउटलाइन बनाया करती थीं लेकिन अब उनके काम में धागा ज्यादा इस्तेमाल होने लगा है। अब उनके काम में धागे रंगों के साथ मर्ज हो जाते हैं। उनका कहना है कि धागों के जरिए पेंटिंग ज्यादा प्रभावशाली हो जाती है और कैनवास पर कुछ रचने से पहले जो कंपोजिशन मन में होती है धागे के जरिए वह सही आकर ला लेती है। ी लच्छी इस्तेमाल करती हैं।