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#BUSES: आरटीओ, पुलिस की मिलीभगत, अरुणाचल, महाराष्ट्र्र के परमिट पर दौड़ रहीं बसें

#BUSES: आरटीओ, पुलिस की मिलीभगत, अरुणाचल, महाराष्ट्र्र के परमिट पर दौड़ रहीं बसें  

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बस स्टैंड पर बसों के आसपास हाथ ठेलों का जमावड़ा

बस स्टैंड पर बसों के आसपास हाथ ठेलों का जमावड़ा

जबलपुर. बस ऑपरेटर्स राज्य सरकार को जमकर चूना लगा रहे हैं। टूरिस्ट परमिट का टैक्स बचाने के लिए बस ऑपरेटर्स उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित पूर्वोत्तर के उन दूसरे राज्यों में रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं, जहां टूरिस्ट परमिट की फीस मध्यप्रदेश से अपेक्षाकृत बहुत कम है। इन राज्यों के टूरिस्ट परमिट पर मध्यप्रदेश में बसें चला रहे हैं। बस ऑपरेटर्स की आरटीओ और पुलिस से मिलीभगत के चलते प्रदेश में यह गोरखधंधा जमकर फलफूल रहा है। टूरिस्ट परमिट पर चलने वाली बस ऑपरेटर्स के रवैये से यात्री भी हलाकान हो रहे हैं।

5 हजार में परमिट
आरटीओ के सूत्रों के अनुसार टूरिस्ट बसों के परमिट के नाम पर भी बस ऑपरेटर्स फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में टूरिस्ट बस परमिट का टैक्स 8 सौ रुपए प्रति सीट प्रति माह है। जबकि उप्र में यह टैक्स 133 रुपए व महाराष्ट्र में 4 सौ रुपए प्रति सीट प्रति माह है। वहीं अरुणाचल प्रदेश में पूरी बस का एक माह के लिए टूरिस्ट परमिट का टैक्स महज 5000 रुपए है। मणिपुर में यही टैक्स करीब 5500 रुपए है। इसके चलते बस ऑपरेटर्स उप्र, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश व मणिपुर के परमिट पर गाड़ियां चला रहे हैं।

कम सवारी पर ट्रिप कैंसिल
टूरिस्ट बसों की मनमानी से इलाहाबाद, नागपुर व छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाले यात्री अक्सर हलाकान होते रहते हैं। कहीं भी रोककर सवारी चढ़ाना, उतारने के रवैये से यात्रियों को विलम्ब होता है। सवारियों की संख्या कम होने पर ये कहीं भी बस का ट्रिप कैंसिल कर देते हैं। इन मनमानियों और यात्रियों की परेशानियों की की ओर किसी जिम्मेदार की नजर नहीं है।

टूरिस्ट परमिट की बसों के लिए सफेद रंग तय है। बीच मे एक नीली पट्टी व गोला बनाकर टूरिस्ट परमिट लिखा होना चाहिए। लेकिन शहर से चलने या गुजरने वाली टूरिस्ट परमिट की बसों में इस नियम का पालन नहीं हो रहा है। जानकारों के अनुसार राज्य में बसों का किराया शुरुआती 5 किमी के लिए 7 रुपए व इसके बाद अधिकतम 1 रुपए 25 पैसे प्रति किमी निर्धारित है। लेकिन जबलपुर से नागपुर के लिए ही रात को चलने वाली टूरिस्ट परमिट की बसों में 800 रुपए तक किराया वसूला जा रहा है। जबकि यह 344.5 रुपए से अधिक नहीं लिया जा सकता। इसी तरह इलाहाबाद, रीवा, अमरकंटक की बसों में भी मनमानी व अधिक किराया वसूला जा रहा है।

इनका कहना है
नियम विरुद्ध बस संचालन पर परिवहन विभाग कारवाई करता है। समय-समय पर बसों की चेकिंग की जाती है। अवैध परमिट की बसों की शिकायत मिलने पर उचित व नियमानुसार कारवाई की जाएगी।

- जितेंद्र रघुवंशी, आरटीओ जबलपुर