पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पौत्र अभिनेता अरुणोदय सिंह का कनाडियन मूल की ली एल्टन से विवाह जितने शानदार तरीके से हुआ था, दोनों के दाम्पत्य जीवन का अंत भी उतने ही नाटकीय अंदाज में हुआ। अरुणोदय और ली एल्टन के डॉग्स हर दिन लड़ते। इस पर दोनो मे बहस होती। अरुणोदय ने भोपाल फैमिली कोर्ट से तलाक ले लिया। ली ने इस फैसले को चुनौती दी। लेकिन मप्र हाइकोर्ट ने ली की अपील निरस्त कर कुटुंब न्यायालय की तलाक की डिक्री पर मुहर लगा दी।
- भोपाल कुटुंब न्यायालय के फैसले पर मप्र हाईकोर्ट की मुहर, ली की अपील खारिज
राहुल मिश्रा, जबलपुर @ पत्रिका.
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पौत्र अभिनेता अरुणोदय सिंह का कनाडियन मूल की ली एल्टन से विवाह जितने शानदार तरीके से हुआ था, दोनों के दाम्पत्य जीवन का अंत भी उतने ही नाटकीय अंदाज में हुआ। अरुणोदय और ली एल्टन के डॉग्स हर दिन लड़ते। इस पर दोनो मे बहस होती। क्षुब्ध होकर अरुणोदय ने ली के पास जाना ही छोड़ दिया । ली कनाडा गई तो अरुणोदय ने गुपचुप भोपाल फैमिली कोर्ट से एकतरफा तलाक ले लिया। ली ने कनाडा से ही तलाक के इस फैसले को चुनौती दी। लेकिन मप्र हाइकोर्ट के जस्टिस सुजय पॉल व जस्टिस पीसी गुप्ता की डिवीजन बेंच ने ली की अपील निरस्त कर कुटुंब न्यायालय की तलाक की डिक्री पर पुष्टि की मुहर लगा दी।
कोर्ट ने कहा कि ली ने कुटुंब न्यायालय के पर्याप्त अवसर देने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया, इसलिए उसके खिलाफ पारित तलाक का एकतरफा आदेश उचित है।।
यह है मामला-
न्यूफाउंडलैंड, कनाडा निवासी डगलस एल्टन की पुत्री ली एनी एल्टन की ओर से हाइकोर्ट में यह अपील दायर की गई। इसमें कहा गया कि 13 दिसम्बर 2016 को विशेष विवाह अधिनियम के तहत अरुणोदय सिंह के साथ उनका विवाह भोपाल में पंजीकृत किया गया। अरुणोदय सिंह पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के बेटे है।विवाह के बाद वे मुंबई के खार में रहने लगे। यहां कई बार अरुणोदय से उनकी झड़प हुई, लेकिन ये इतनी गम्भीर नही थी कि तलाक हो जाये। अरुणोदय ने अचानक 2019 के बीच मे आनाजाना बन्द कर दिया। 10 मई 2019 को उंसने चुपचाप भोपाल के फैमिली कोर्ट में अपीलकर्ता ली एल्टन के खिलाफ तलाक का केस लगा दिया। इसकी जानकारी तक उसे नही मिली। ली ने भी अपने पति के खिलाफ भरणपोषण व वैवाहिक सम्बन्धों की पुनर्स्थापना के केस मुंबई में दायर कर दिए। ली को जब तलाक के केस की जानकारी लगी तो उसने इस केस को मुंबई स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बावजूद भी 18 दिसम्बर 2016 को अपीलकर्ता ली एल्टन की गैरमौजूदगी में कुटुंब न्यायालय ने तलाक की एकतरफा डिक्री पारित कर दी।
6 माह में हो गया तलाक का फैसला-
कुटुंब न्यायालय भोपाल के इसी आदेश को अपील में चुनौती देते हुए अधिवक्ता आदित्य संघी ने तर्क दिया कि अपीलकर्ता को बिना जानकारी के पारित एकतरफा तलाक का आदेश अवैध और निरस्त करने योग्य है। उन्होंने 6 महीने के अंदर तलाक के मामले का एकतरफा फैसला होने पर भी आश्चर्य व एतराज जताया। अरुणोदय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि अपीलकर्ता ली के ईमेल से उसकी अरुणोदय के साथ न रहने की मंशा साफ उजागर है। ली ने सुको में मामला ट्रांसफर करने का आवेदन दिया। सुको ने 14 अक्टूबर 2019 को ली व अरुणोदय को मध्यस्थता के लिए बुलाया। अरुणोदय पहुंचे, लेकिन ली नहीं। इस पर सुको ने आवेदन निरस्त कर दिया। इसके बाद ही कुटुंब न्यायालय ने एकतरफा तलाक का फैसला दिया। उन्होंने कहा कि सुको की गाइडलाइंस के तहत प्रस्तुत ली की क्रूरता के साक्ष्यों पर विचार के बाद यह फैसला दिया गया। कोर्ट ने उनके तर्कों से सहमति जताई।
विवाह का शाही रिसेप्शन था चर्चा में-
13-14 नबंबर 2016 को चुरहट में इस विवाह का रिसेप्शन दिया गया। करीब 2 एकड़ क्षेत्र मे हुए रिसेप्शन में सीधी जिले आसपास व देश भर से करीब 50 हजार मेहमानों को बुलाया गया। रसोई पकाने के लिए करीब एक हजार रसोइये लगाए गए। यह रिसेप्शन अरसे तक क्षेत्रीयजनों के लिए चर्चा का विषय रहा।