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काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ….

अटल बिहारी वाजपेयी

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atal bihari vajpayee latest news

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जबलपुर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बीमार हैं। सोमवार को एम्स में भर्ती कराया गया। हालांकि भाजपा द्वारा जारी किए गए अधिकृत बयान के अनुसार 93 साल के वाजपेयी को यहां नियमित जांच के लिए लाया गया है पर इस खबर से देशभर की तरह संस्कारधानी में उनके प्रशंसक चिंतित हो उठे। उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामनाएं की जा रहीं हैं।


हैं हजारों शुभचिंतक
वाजपेयीजी लंबे समय से बीमार चल रहे हैं और घर पर ही डॉक्टरों की निगरानी में हैं। राजनेता के रूप में शहर में वे कई बार आ चुके हैं और उनकी अनेक सुखद स्मृतियां याद की जाती रहीं हैं। उनके कवि रूप के तो हजारों प्रशंसक हैं। साहित्यप्रेमी बताते हैं कि उनकी कविताएं जीवन में नया जोश भर देती हैं। बाजपेईजी की प्रमुख कविताएं मेरी इक्यावन कविताएं शीर्षक पुस्तक में संकलित हैं।

प्रस्तुत हैं उनकी चुनिंदा कविताएं.

1.
क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं !
कर्तव्य पथ पर जो मिला, ये भी सही वो भी सही !!
वरदान नहीं मांगूंगा, हो कुछ भी पर हार नहीं मानूंगा !
हार नहीं मानूंगा रार नयी ठानूंगा !
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ !
गीत नया गाता हूँ।

2.
बाधाएँ आती हैं आएँ, घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
कुछ काँटों से सज्जित जीवन,प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा

3.

मैंने जन्म नहीं मांगा था!
मैंने जन्म नहीं मांगा था,किन्तु मरण की मांग करुँगा।
जाने कितनी बार जिया हूँ,जाने कितनी बार मरा हूँ।
जन्म मरण के फेरे से मैं,इतना पहले नहीं डरा हूँ।
अन्तहीन अंधियार ज्योति की,कब तक और तलाश करूँगा।
मैंने जन्म नहीं माँगा था,किन्तु मरण की मांग करूँगा।

4.
न दैन्यं न पलायनं
कर्तव्य के पुनीत पथ को हमने स्वेद से सींचा है,
कभी-कभी अपने अश्रु और प्राणों का अध्र्य भी दिया है।
किंतु, अपनी ध्येय-यात्रा में हम कभी रुके नहीं हैं।
किसी चुनौती के सम्मुख कभी झुके नहीं हैं।
आज,जब कि राष्ट्र-जीवन की
समस्त निधियाँ,दाँव पर लगी हैं,
और, एक घनीभूत अंधेरा—
हमारे जीवन के सारे आलोक को
निगल लेना चाहता है;
हमें ध्येय के लिए जीने, जूझने और आवश्यकता पडऩे पर
मरने के संकल्प को दोहराना है।
आग्नेय परीक्षा की इस घड़ी में—
आइए, अर्जुन की तरह उद्घोष करें-
‘‘न दैन्यं न पलायनं‘