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आयुष, डेंटल डॉक्टर छह महीने का क्रैश कोर्स करके लिख सकेंगे एलोपैथी दवा

एमयू ने क्रैश कोर्स और परीक्षा कराने का भेजा प्रस्ताव

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Doctor News Khargone

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जबलपुर . राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नर्सेस को ब्रिज कोर्स कराकर वेलनेस सेंटर में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर बनाने की योजना के बाद अब प्रदेश में आयुष और डेंटल डॉक्टर्स को क्रैश कोर्स कराकर सरकारी अस्पतालों में एमबीबीएस चिकित्सकों की कमी दूर करने की तैयारी है। मरीजों को आधुनिक एवं प्राथमिक उपचार सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रदेश सरकार ने आयुष एवं डेंटल डॉक्टर्स को प्रायमरी हेल्थ केयर से जुड़ी एलोपैथी दवा प्रिस्क्राइब करने की छूट देने की योजना बनाई थी। इस योजना पर मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने पहल करते हुए आयुष एवं डेंटल डॉक्टर्स के लिए छह माह का क्रैश कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक विश्वविद्यालय को छह माह का ऐलोपैथी से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद विवि स्तर पर परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा उत्तीर्ण करने पर आयुष एवं डेंटल डॉक्टर्स को प्राथमिक उपचार से संबंधित ऐलोपैथी दवा लिखने की पात्रता मिलेगी।

13 मेडिकल कॉलेज सेंटर
विवि ने स्वास्थ्य मंत्री को भेजे प्रस्ताव में छह माह का प्रशिक्षण शुरू करने में दिलचस्पी दिखाई है। इसे एलोपैथी क्रैश कोर्स का नाम दिया है। प्रशिक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ एमओयू का प्रस्ताव है। विवि के सम्बद्ध 13 सरकारी कॉलेजों में प्रशिक्षण केंद्र बनाने की योजना है। ताकि आयुष एवं डेंटल डॉक्टर्स को प्रदेश में ही क्रैश कोर्स करने का मौका मिल सकें।

प्राथमिक उपचार सुलभ होगा
आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने एलोपैथी क्रैश कोर्स के निर्णय को अच्छा बताया है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञों की निगरानी में आयुष डॉक्टर्स ऐलोपैथी प्रशिक्षण लेंगे। प्रस्ताव पर अमल होता है तो गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण होगा। आयुष डॉक्टर्स को प्राथमिक उपचार से संबंधित एलोपैथी दवा लिखने का अधिकार मिलने पर मरीजों का उपचार आसान होगा।

राज्य सरकार की ओर से आयुष एवं डेंटल (बीडीएस) डॉक्टर्स के लिए एलोपैथी क्रैश कोर्स प्रारंभ करने पर विचार किए जाने की जानकारी मिली थी। इससे प्रायमरी हेल्थ केयर सिस्टम को मजबूती मिलेगी। निर्णय होने पर विवि क्रैश कोर्स कराने और परीक्षा कराने के लिए तैयार है। क्रैश कोर्स के संचालन को लेकर प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्री को प्रेषित किया है।
डॉ. आरएस शर्मा, कुलपति, मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय