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जबलपुर. आयुष्मान योजना के तहत सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाने वाली सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल की संचालक डॉ. दुहिता पाठक और उसके पति डॉ. अश्वनी पाठक ने गिरोह में शामिल अधिकारी और कर्मचारियों के नामों का खुलासा एसआइटी के सामने किया है। यह भी बताया कि किस अधिकारी और कर्मचारी का क्या काम था। फर्जीवाड़ा जारी रखने के लिए उन्हें दी जाने वाली रकम की भी जानकारी दी। डॉ. पाठक दम्पती ने उन अस्पतालों के नाम भी बताए जो यह फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि एसआइटी की कार्रवाई की जद में और भी अस्पताल आ सकते हैं। डॉ. पाठक दम्पती वर्तमान में जेल में बंद हैं।
सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत फर्जीवाड़े का मामला
एसआइटी से पूछताछ में डॉ. पाठक दम्पती ने उगले गिरोह में शामिल अधिकारी-कर्मचारियों के नाम
पत्नी पर डाला पूरा मामला
डॉ. अश्वनी पाठक ने कार्रवाई से बचने के लिए फर्जीवाड़े की बात पत्नी डॉ. दुहिता पाठक पर डाल दी। यह इसलिए भी किया गया, ताकि दोषमुक्त होने के बाद वह फिर से मेडिकल कॉलेज में रीस्टेट हो सके और उसे मेडिकल अस्पताल से मिलने वाले सभी लाभ मिल सकें। डॉ. अश्वनी पाठक ने यह भी स्वीकार किया कि वह सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में मरीजों के ऑपरेशन और ओपीडी संचालित करने के लिए कई बार मेडिकल अस्पताल से गायब हो जाता था।
नहीं मिली थी अनुमति
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि डॉ. दम्पती ने होटल वेगा में मरीजों को भर्ती करने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी थी। वहां से अनुमति मिलने के पूर्व ही उन्होंने होटल में मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया था।
बिल के हिसाब से देते थे कमीशन
जेल में बंद डॉ. दुहिता पाठक और उसके पति डॉ. अश्वनी पाठक ने एसआइटी को बताया कि ग्रामीण इलाकों के झोलाछाप डॉक्टरों के अलावा आसपास के जिलों के दलाल भी उनके अस्पताल में आयुष्मान योजना के हितग्राही मरीजों को लेकर आते थे। दलालों का कमीशन बिल के हिसाब से तय होता था। उन्हें पांच से दस प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। कई एम्बुलेंस चालक भी मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराते थे।
Published on:
13 Nov 2022 02:59 pm

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