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जबलपुर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों को एमपी ऑनलाइन की केंद्रीयकृत काउंसिलिंग के बिना बीएड में प्रवेश का अधिकार नहीं है। यह नियम सागर विश्वविद्यालय पर भी लागू होता है। एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा व जस्टिस विशाल धगट की डिवीजन बेंच ने यह निर्देश दिए।
सागर विश्वविद्यालय के मामले में हाईकोर्ट का निर्देश
याचिकाकर्ता नर्मदा शिक्षा महाविद्यालय, जबलपुर व सेंटर फॉर हायर स्टडीज, जबलपुर की ओर से अधिवक्ता मुकुंददास माहेश्वरी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सागर विश्वविद्यालय ने तबरीबन दो हजार आवेदकों को स्वयं की काउंसिलिंग प्रवेश दिए। विश्वविद्यालय ने 21 अगस्त 2019 को अपनी गलती स्वीकार करते हुए दाखिले निरस्त कर दिए। हाईकोर्ट ने ही छात्र-छात्राओं के भविष्य का खयाल करते हुए संयुक्तसंचालक उच्च शिक्षा की पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी थी। यह कमेटी सागर विश्वविद्यालय में हुई अनियमितता की जांच कर, वरीयताक्रम के अनुसार आवेदकों को कॉलेजों का चयन कर प्रवेश देगी।
Published on:
07 Sept 2019 09:01 pm
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