
बगलामुखी सिद्ध पीठ
जबलपुर। मां बगलामुखी को शत्रुहनता के रूप में जाना जाता है। खासकर राजनीति क्षेत्र से जुड़े लोग माता के इस रूप का पूजन जरूर करते हैं। जबलपुर का बगलामुखी मंदिर भी ऐसे ही देवी दरबारों में शामिल है जहां मन्नतों की हजारों ज्योत के बीच माता का मनोहारी रूप विराजमान है। यहां भक्त शत्रुओं से रक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं। माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में प्रमुख देवी के रूप में जानी जाती हैं। नवरात्र में पूरे नौ दिनों तक चार पहर का पूजन होता है।
बगलामुखी सिद्ध पीठ जहां शत्रुओं से बचाने होती है पूजा
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कराई थी स्थापना
मन्नतों और शत्रुहनता के रूप में होता पूजन
शंकराचार्य महाराज ने बनवाया है मंदिर
मंदिर के प्रमुख पुजारी ब्रह्मचारी चैतन्यानंद महाराज के अनुसार मंदिर का भूमिपूजन साल 1999 में 18 जुलाई को हुआ था, वहीं 7 फरवरी 2000 को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने मां पीतांबरा बगलामुखी की स्थापना करवाई थी। इसके दूसरे दिन ही शंकराचार्य आश्रम शुरू हुआ था।
मन्नतों की ज्योत से जगमग है दरबार
ब्रह्मचारी चैतन्यानंद महाराज ने बताया कि माता के दरबार में पूरे साल लोग मन्नतें मांगते हैं, जिनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं वे नवरात्र में अखंड ज्योत जलवाते हैं। हर साल यज्ञ शाला में हजार से अधिक मनोकामनाओं की ज्योत प्रज्ज्वलित की जाती हैं। जिनके दर्शनों को रोजाना सैकड़ों भक्त मंदिर पहुंचते हैं।
दिन के अनुसार माता का श्रृंगार
ब्रह्मचारी स्वामी चैतन्यानंद महाराज द्वारा माता का वैदिक विधि से नित्य पूजन अर्चन किया जाता है। यहां देवी मां हर रोज भक्तों को नए रूप में दर्शन देती हैं। हर तिथि के रंग के हिसाब से माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है। जैसे कि बुधवार को मां हरे रंग, गुरुवार को मां पीले, मंगलवार को लाल रंग वस्त्र पहनाए जाते हैं।
Updated on:
12 Oct 2021 12:17 pm
Published on:
12 Oct 2021 12:10 pm
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