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प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की स्वनिर्मित बीएड-डीएड प्रवेश प्रक्रिया पर रोक

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश  

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जबलपुर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश के जरिए राज्य के निजी विश्वविद्यालयों की स्वनिर्मित बीएड-डीएड प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आरएस झा व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने इस सम्बंध में निर्देश जारी किए हैं।

यह दलील दी
अधिवक्ता मुकुंददास माहेश्वरी ने नर्मदा शिक्षा महाविद्यालय, जबलपुर की ओर से पक्ष रखते हुए दलील दी कि स्वषोषित निजी, केंद्रीय व समकक्ष विश्वविद्यालयों की ओर से बीएड व डीएड में छात्र-छात्राओं के लिए स्वनिर्मित प्रवेश प्रक्रिया अपना ली गई है। यह रवैया चुनौती के योग्य है। लिहाजा, सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में राज्य शासन की ओर से निर्धारित एमपी ऑनलाइन की केंद्रीयकृत योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया अनुसार काउंसिलिंग पद्धति से एकरूपता कायम रखते हुए प्रवेश प्रणाली को एक समान रखा जाए।

नियमानुसार ही संचालित करना होगी प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने सभी बिंदुओं पर गौर करने के बाद आदेश में व्यवस्था दी कि सभी संस्थान केंद्र शासन की एनसीटीइ की नीति और प्रदेश शासन की बीएड व डीएड की नीति के अनुरूप बीएड व डीएड में प्रवेश देंगे। इसके लिए एमपी ऑनलाइन की केंद्रीयकृत काउंसिलिंग और वरिष्ठता क्रम विषयक चयन सूची के आधार पर ही प्रक्रिया को अंतिम रूप देंगे।
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इन्हें करना होगा पालन
हाईकोर्ट ने जो अंतरिम आदेश पारित किया है, वह पीपुल्स विश्वविद्यालय भोपाल, आरकेडीएफ विश्वविद्यालय, जागरण लेक सिटी विश्वविद्यालय, सर्वपल्ली राधाकृष्णन विश्वविद्यालय, एलएनसीटी विश्वविद्यालय, मध्यांचल प्रोफेशनल विश्वविद्यालय, सीहोर के मानसरोवर ग्लोबल विश्वविद्यालय, वीआइटी विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा के जीएच रायसोनी विश्वविद्यालय, रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, इंदौर के ओरिएंटल विश्वविद्यालय, श्रीवैष्णव विश्वविद्यालय, मेडीकेप्स विश्वविद्यालय, मालवांचल विश्वविद्यालय पर लागू होगा।

पहले इन पर लग चुकी है रोक
पूर्व में केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर पर नवम्बर 2018 और श्रीकृष्णा विश्वविद्यालय छतरपुर, सरदार पटेल विश्वविद्यालय बालाघाट, एककेएस विश्वविद्यालय सतना पर मई 2019 में ही रोक लग चुकी है। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा ने पक्ष रखा।