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बापू ने नर्मदा तट पर गाया था प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए

संस्कारधानी की रग-रग में गांधी-शास्त्री की यादें: महात्मा गांधी चार बार आए थे यहां, शास्त्रीजी के नाम पर बना था शहर का पहला रेलवे ओवरब्रिज

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Bapu had sung on the Narmada coast. Dear Bhajan, 'Vaishnav jan, say so

Bapu had sung on the Narmada coast. Dear Bhajan, 'Vaishnav jan, say so

जबलपुर. स्वतंत्रता संग्राम से देशवासियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जोडऩे महात्मा गांधी चार बार जबलपुर आए थे। उनसे जुड़ी स्मृति आज भी संजोई हुई हैं। बापू ने संस्कारधानी आगमन पर नर्मदा तट तिलवाराघाट में बैठकर अपना प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाने रे गाया था।

पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री के नाम पर ब्रिज

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जमाने में शहर में पहला रेलवे ओवर ब्रिज बना था। जिसे शास्त्री ब्रिज के नाम से जाना जाता है। ये ओवरब्रिज शहर के दो हिस्सों को जोड़ता है। 13 जनवरी 1964 को तत्कालीन राज्यमंत्री परमानंद भाई पटेल ने इस ओवरब्रिज का शिलान्यास किया था। पीडब्लूडी विभाग के इंजीनियरों के अनुसार इस ओवरब्रिज की क्षमता 30-40 टन तक के माल का भार सहने की है।

संस्कारधानी में बापू से जुड़ी स्मृति
20 मार्च 1921 को असहयोग आंदोलन व राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति जागृति लाने बापू का नगर आगमन हुआ था। इस दौरान उनकी शिष्या मीरा बेन भी साथ में थीं। वे खजांची चौक में श्याम सुंदर भार्गव की कोठी में ठहरे थे। दूर-दूर से जुटे लोगों को सम्बोधित करते हुए बापू ने राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल होने सभी में नई ऊ र्जा का संचार किया था।
03 सितंबर 1933 को महात्मा गांधी का दूसरी बार नगर आगमन हुआ। इस दौरान हरिजन व छुआछूत आंदोलन जोरों पर था। इन आंदोलनों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने उनका आगमन हुआ था। उनके साथ महादेव भाई देसाई व कनु गांधी भी आए थे। इस बार बापू साठिया कुआं स्थित ब्यौहार राजेन्द्र के घर पर ठहरे थे।
27 फरवरी 1941 को तीसरी बार बापू अल्प प्रवास पर संस्कारधानी आए थे। वे कमला नेहरू अस्पताल का उद्घाटन करने इलाहाबाद जा रहे थे। इस बार वे धुआंधार देखने भेड़ाघाट भी गए थे।
27 अप्रेल 1942 को वे इलाहाबाद कांग्रेस की बैठक में शामिल होने जा रहे थे। जिसमें कांग्रेस द्वारा युद्ध समिति के प्रस्ताव को नकार देने को लेकर कार्यकारिणी में विचार विमर्श होना था। बापू इस दौरे के दौरान मदनमहल स्थित पं द्वारका प्रसाद मिश्र के घर में ठहरे थे।

महात्मा गांधी चार बार जबलपुर आए। उनसे जुड़ी स्मृति दर्ज हैं। बापू ने पहले नगर आगमन के दौरान तिलवाराघाट में अपना प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेणे कहिए जे पीर पराई जाने रेÓ गाया था।
राजकुमार गुप्ता, लेखक व पुरातत्वविद्

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