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‘संजीवनी’ से कम नहीं बकरी का दूध, यहां शुरू होगी फार्मिंग

‘संजीवनी’ से कम नहीं बकरी का दूध, यहां शुरू होगी फार्मिंग

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जबलपुर। बकरी का दूध बाजार में लांच किए जाने के बाद बकरी पालन के व्यवसाय को को संजीवनी मिलने की आशा जागी है। इस व्यवसाय के लिए यह भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि जिले में बड़ी संख्या में छोटे-बड़े किसान गोट फार्मिंग से जुड़े हुए हैं। लेकिन यह सीमित और एक दिशा में किया जा रहा है। इसके लिए किसानों तक शासन प्रशासन को पहुंच बनानी होगी साथ ही उन्हें बढ़ावा देना होगा। बकरी के दूध को प्रमोट करने बकरी व्यवसाय के प्रति भी लोग आकर्षित होंगे। जिले में बकरी व्यवसाय से करीब 200-250 से लोग जुड़े हुए हैं। कुछ व्यापक स्तर पर गोट फार्मिंग भी कर रहे हैं।

संगठित करना जरूरी
फिलहाल जिले में बकरी व्यवसाय असंगठित रूप से चल रहा है। यदि शासन प्रशासन इसे एक संगठित रूप देकर व्यवसाय से जुड़े लोगों को जोडकऱ बकरी के दूध उत्पादन के लिए आकर्षण पैदा करे तो निश्चित ही ग्रामीण आजीविका मिशन को लाभ मिलेगा। फिलहाल सिवनी-बालाघाट से गोट मिल्क मंगाया जा रहा है।

IMAGE CREDIT: Rohit Dewangan

सेहत के लिए है फायदेमंद
विशेषज्ञों का मनना है कि बकरी का दूध सेहत के लिए फायदेमंद है। कोरोना काल के साथ ही डेंगू में भी यह लाभप्रद माना जाता है। बकरी का दूध इम्यून सिस्टम के साथ मेटाबॉलिज्म भी बढ़ाता है। हड्डियों को मजबूत करने के लिए फायदेमंद और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों से भी भरपूर है। दूध पोस्टिक खनिजों खनिज तत्वों से भरपूर होता है। आमतौर पर बकरी का दूध बाजार में सरलता से नहीं मिलता है।

यह है स्थिति

250 छोटे किसान जुड़े
35 फीसदी दूध उत्पादन
1.25 से अधिक बकरियां
10 के लगभग गोट फार्मिंग


सरकार की इस योजना से बकरी व्यवसाय से जुड़े लोगों को फायदा होगा। इसके लिए संगठित कर दूध उत्पादन आदि से जुड़ी आवश्यक ट्रेनिंग देने की जरूरत है।
- स्वामित दुशाध, संचालक, बकरी पालक

छत्तरपुरा, घाना जैसे अंगीकृत गांवों में छोटे भूमिहीन किसानों को हम बकरी पालन के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह अच्छा निर्णय है, युवाओं में रुचि बढ़ेगी।
- डॉ. अनिल कुमार गौर, प्रमुख अन्वेषक फार्मर फस्र्ट परियोजना, वीयू