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bhai dooj 2017- इस मुहूर्त पर बहन ने लगाया तिलक तो भाई को नहीं लगेगी बुरी नजर, जानिए पहले किस भगवान की पूजा है फलदायी

बहन को भगवान की पूजा के बाद के ही भाई को लगाना चाहिए तिलक

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जबलपुर। दिवाली के बाद अब भाईदूज की तैयारियां शुरू हो गई है। बहनें अपने भाईयों से इस दिन मिलने वाले स्पेशल गिफ्ट लेकर उत्साहित है। वहीं, भाई भी इस दिन को खास बनाने के लिए कई प्लान बना रहे है। इसमें सरप्राइज गिफ्ट से लेकर आउटिंग तक के प्लान है। दीपावली के दो दिन बाद कार्तिक मास की द्वितीया को भाई-बहन के रिश्तें के बीच मिठास घोलने वाले पर्व भाईदूज का संयोग होता है। इस दिन बहनें सज संवरकर अपने भाई को विधि-विधान के अनुसार तिलक करती है। ऐसी मान्यता है कि दूज पर किया गया बहन का यह तिलक भाई को बुरी नजर से बचाता है।
दूसरा सबसे बड़े त्योहार
देश में मुख्य रूप से भाई-बहन के स्नेह के प्रतीक दो मुख्य त्योहार है। इसमें एक रक्षाबंधन है, जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसमें भाई, बहन की रक्षा की प्रतिज्ञा करता है। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा त्योहार भाईदूज का है, जो दीपावली के बाद मनाया जाता है। इसमें बहनें, भाई की लंबी उम्र की कामना करती है। ये पर्व भाई और बहन के पावन रिश्तें में प्रेमभाव स्थापित करता है।
ये 2 घंटे 15 मिनट शुभ
हिन्दू पंचांग के मुताबिक इस वर्ष भाई दूज का त्यौहार शनिवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्ष 2017 में 21 अक्टूबर को भाईदूज पर तिलक के लिए करीब २ घंटे १५ मिनट का समय शुभ है। इस दिन दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से 03 बजकर 27 मिनट के बीच का समय तिलक के लिए उत्तम बताया गया है।
पहले विष्णु और गणेश की पूजा
भाईदूज पर तिलक से पहले बहनों को पूजन करना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भाईदूज के दिन बहन को उठकर सुबह पहले स्नान करना चाहिए। इसके बाद शुद्ध वस्त्र धारण करके भगवान गणेश और विष्णु की आराधना चाहिए। इसके बाद बहनों को भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगल कामना करके तिलक लगाती है। इस दिन बहनें बेरी पूजन भी करती है।
मान्यता है कि इस दिन बहन के घर भोजना करना चाहिए
स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन भाई को बहन के घर पर जाकर भोजन करना चाहिए। अगर बहन अविवाहित है तो उसके हाथों का पकाया भोजन करना उत्तम फलदायी है। अपनी सगी बहन न होने पर चाचा, भाई, मामा आदि की पुत्री अथवा पिता की बहन के घर जाकर भोजन करना चाहिए। इस दिन भोजन के बाद बहन को गहने, वस्त्र सहित अन्य उपहार देने की परंपरा है। इस दिन यमुना में स्नान का विशेष महत्व है।