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भोपाल गैंगरेप: सीएसपी को दंड, तीन थानेदारों की जांच, प्रमुख सचिव और डीजीपी भी बने पार्टी

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किए तर्क

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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने बताया कि भोपाल गैंगरेप के लिए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच जुलाई के अंत तक पूरी कर ली जाएगी। बताया गया कि विभागीय जांच में एक सीएसपी को दोषी पाकर दंडित किया गया। जबकि तीन थाना प्रभारियों व दो उपनिरीक्षकों के खिलाफ जांच अंतिम चरण में है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच से सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए चार सप्ताह की मोहलत ले ली है।

हाईकोर्ट ने खुद लिया था संज्ञान
चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता ने भोपाल गैंगरेप पर मीडिया में प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेकर यह जनहित याचिका दायर की है। याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह विभाग प्रमुख सचिव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, डीजीपी, आईजीपी भोपाल रेंज व एसपी भोपाल को पक्षकार बनाया गया है। 8 जनवरी 2018 को कोर्ट ने सरकार से दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था।

यह है मामला
भोपाल निवासी एएसआई की पुत्री के साथ चार आरोपितों ने कोचिंग से लौटते वक्त 31 अक्टूबर की देर शाम गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। घटना हबीबगंज आरपीएफ चौकी के पास हुई थी। पीडि़ता ने परिजनों के साथ खुद एक आरोपित को पकड़ा और पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने करीब 24 घंटे बाद केस दर्ज किया था। इसके बाद फरार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया था। जिला अदालत ने चारों अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

11 में से 8 गवाहों के बयान दर्ज
उपमहाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव ने सोमवार को कार्रवाई का ब्योरा पेश करते हुए बताया कि एक सीएसपी को जांच में दोषी पाए जाने पर विभागीय दंड से दंडित किया गया। जबकि हबीबगंज, एमपी नगर व जीआरपी थाना प्रभारियों सहित दो एसआई के खिलाफ संयुक्त जांच जारी है। इसमें 11 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने थे। जिनमें से 8 के बयान दर्ज हो चुके हैं। शेष बयान भी जल्द दर्ज कर लिए जाएंगे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 27 अगस्त नियत की है।