
एमपी मेडिकल यूनिवर्सिटी
जबलपुर. MP में व्यापम की तर्ज पर इस इकलौती यूनिवर्सिटी में महा घोटाला सामने आया है। इस महाघोटाले के संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग से शिकायत भी की गई है। बताया जा रहा है कि शिकायत पर विभाग ने जांच भी शुरू कर दी है।
बता दें कि अभी व्यापमं घोटाले की आंच ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब एक नया महा घोटाला सामने आया है। यह घोटाला भी चिकित्सा शिक्षा से ही जुड़ा है। इस ताजा तरीन मामले में ऐसे तमाम छात्रों को पास कर दिया गया है जिन्होंने परीक्षा दी ही नहीं यानी अनुपस्थित रहे थे।
ये है व्यापमं घोटाला
बता दें कि प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर में एमपी का व्यापमं घोटाला लंबे अरसे तक चर्चा का केंद्र बिंदु रहा था। इसके तहत प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों की शुरुआत 1990 के दशक से ही शुरू हो चुकी थीं। पहली एफआईआर 2000 में छतरपुर जिले में दर्ज हुई। 2004 में खंडवा में 7 केस दर्ज हुए। वर्ष 2009 तक एक भी बड़ा मामला सतह पर नहीं आया। घोटाले से जुड़े सफेदपोश अंदर ही अंदर बैठकर कमाई करते रहे। 2009 में पीएमटी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे, जो काफी गंभीर थे। इसकी जांच के लिए कमेटी बनायी गई और 100 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। 2012 में एसटीएफ का गठन किया गया, जिसने 2013 में बड़े नामों के होने का जिक्र किया लेकिन, खुलासा नहीं किया। पहला नाम पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का आया। उनके साथ 100 से ज्यादा नाम दर्ज हुए। व्यापमं में तैयार की जा रही चार्जशीट में सिर्फ नेताओं के नहीं, बल्कि बिचौलियों, छात्रों, पुलिसकर्मियों, अभिभावकों के भी नाम दर्ज हैं। व्यापमं में एक-एक परीक्षा पर सरकारी अफसर, बिचौलिए और छात्रों व आवेदकों के बीच बड़े तार पाए गए हैं। व्यापमं के अंतर्गत पास हुए 1020 अभ्यर्थियों के फॉर्म गायब हैं। नितिन महेंद्र नाम का कर्मचारी है, जो बंद कमरे में कंप्यूटर ऑन कर रिकॉर्ड बदलने का काम करता था। एसटीएफ के मुताबिक 92,175 अभ्यर्थियों के डॉक्यूमेंट्स में बदलाव किये गये, ताकि घूस देने वालों को हाई रैंक दिलाई जा सके।
एमपी मेडिकल यूनिवर्सिटी का घोटाला
इसके बाद अब नया मामला सामने आया है। यह मामला प्रदेश की इकलौती मेडिकल यूनिर्वसिटी से जुड़ा है। इस नवीन प्रकरण में जहां छात्र-छात्राओं को पास-फेल करने का बड़ा खेल खेला गया। वहीं ऐसे छात्र-छात्राओं को भी पास कर दिया गया जिन्होंने परीक्षा में अनुपस्थित रहे। इस घोटाले का आरोप विश्वविद्यालय का रिजल्ट बनाने वाली कंपनी माइंडलॉजिक्स पर लगा है।
बताया जा रहा है कि माइंडलॉजिक्स नाम की कंपनी को छात्रों के रिजल्ट का काम दिया गया था, लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी चौंकाने वाली है। दरअसल इस पूरे मामले की शिकायत आरटीआई एक्टविस्ट अखिलेश त्रिपाठी ने चिकित्सा शिक्षा विभाग से की थी, जिस पर जांच शुरु हो गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जब शिकायत पर जांच के आदेश दिए तो कंपनी, छात्र- छात्राओं के गोपनीय डेटा पर ही कुंडली मारकर बैठ गई, लेकिन जानकारी मांगे जाने पर कंपनी ने बंगलूरू स्थित अपना कार्यालय, लॉकडाउन में बंद होने का हवाला देकर जानकारियां देने में आनकानी की। इसके बाद मामले की छानबीन के लिए मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। बताया जा रहा है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी में रिजल्ट का काम संभाल रही माइंडलॉजिक्स कंपनी की गड़बड़ियां पहले भी पाईं गईं थीं।
Published on:
12 Jun 2021 11:12 am
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
