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सबसे बड़ा फिश एक्वेरियम बना रहा वीयू , सिंगापुर और चाइनीज मछलियां भी तैरेंगी यहां

जबलपुर की वेटरनरी यूविर्सिटी (वीयू) के वैज्ञानिक सबसे बड़े फिश एक्वेरियम का करेंगे निर्माण

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Biggest Fish Aquarium will be build by VU jabalpur

जबलपुर. वेटरनरी यूविर्सिटी (वीयू) के वैज्ञानिक प्रदेश के सबसे बड़े फिश एक्वेरियम का निर्माण करेंगे। यह फिश एक्वेरियम राजभवन में बनाया जा रहा है। करीब एक हजार वर्ग फीट में बनने वाले एक्वेरियम के निर्माण और देखरेख की जिम्मेदारी वीयू के फिशरी विभाग को सौंपी गई है। इसके लिए विभाग की टीम ने विगत दिवस राजभवन का दौरा भी किया।


'नर्मदा एक्वेरियम रखा गया नाम
संस्कारधानी का मां नर्मदा से गहरा नाता है। यहां के लोगों की मां रेवा के प्रति गहरी आस्था और विश्वास को देखते हुए राजभवन में बनने वाले फिश एक्वेरियम का नाम भी 'नर्मदा एक्वेरियमÓ रखा गया है। सिंगापुरी और चाइनीज फिश, नर्मदा की महाशीर, एक दर्जन से ज्यादा प्रजातियां


२० लाख रुपए होंगे खर्च
राजभवन में एक हजार वर्ग फीट में तैयार होने वाले एक्वेरियम की डिजाइन तैयार कर ली गई है। हॉल के चारों ओर आरसीसी टैंक बनाए जाएंगे। टैंक की बाहरी दीवार शीशे की होगी। २० लाख की लागत वाले प्रोजेक्ट में राजभवन के चारों ओर ८ फिश एक्वेरियम बनाए जाएंगे। हॉल के बीचोंबीच एक फाउंटेन भी होगा। एक्वेरियम का प्रबंधन और मेंटनेंस कॉलेज ऑफ फिशरी एंड साइंस विभाग करेगा।


ये मछलियां होंगी
एक्वेरियम में मछलियों की गोल्ड फिश, एग्जाटिक गोल्ड, एंजल फिश, डिस्कश फिश, पिरान्हा, सेवेरम, एल्बिनो फ्लावर, सिल्वर एरोवाना, शकर फिश आदि प्रजातियां होंगी। इसके अलावा नर्मदा में पाई जाने वाली महाशीर आदि मछलियां भी होंगी। वहीं सिंगापुरी और चाईनीज फिश भी आकर्षण होंगी।

वास्तुशास्त्र में भी महत्वपूर्ण
वास्तु शास्त्रियों के अनुसार फिश एक्वेरियम की मछलियां न केवल खूबसूरती बढ़ाती हैं, बल्कि वास्तु शास्त्र में भी महत्वूपर्ण मानी जाती हैं। एक्वेरियम के भीतर बहने वाले पानी की आवाज सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। एक्वेरियम को कार्य व्यवहार में शांति, तरक्की, खुशहाली से भी जोड़ा जाता है।


- टीम ने राजभवन का दौरा किया है। फिश एक्वेरियम निर्माण का प्लान तैयार कर काम भी शुरू कर दिया गया है। इसमें देशी और विदेशी प्रजातियों की मछलियां होंगी।
डॉ. एसके महाजन, डीन, फिशरी कॉलेज
- राजभवन से फिश एक्वेरियम बनाने की जवाबदारी वीयू को दी गई है। यह विवि के लिए भी गौरव की बात है। विवि प्रशासन पूरा सहयेाग कर रहा है।
डॉ. पीडी जुयाल, कुलपति, वेटरनरी विवि