
Hansraj Raghuwanshi
जबलपुर. 'अपने प्रदेश की माटी से जुड़ा हूं, हिमाचल की संस्कृति मेरे रग-रग में बसती है, इसीलिए मेरे गायन में पहाड़ी धुन की झलक देखने को मिलती है। मैं साधु नहीं हूं, लेकिन ऐसा लुक बन गया है। मैंने शुरुआत काफी पहले की थी। मेरा भोला है भंडारी गाने ने सफलता दिलाई। भोले शंकर की कृपा से ही जीवन में मुकाम मिला है।' ये बात 'मेरा भोला है भंडारी' गाकर दुनियाभर में छा जाने वाले गायक हंसराज रघुवंशी ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहीं।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 'मैंने अपने कॉलेज की कंैटीन में काम किया था। उस वक्त आधे घंटे में दो सौ पराठे बना देता था, आज सम्भव नहीं है। उन्हीं दिनों में मेरा पहला गाना 'बाबाजी' आया था। उस गाने के बाद मेरा नाम बाबा प्रचलित हो गया। हंसराज ने कहा, 'मेरे यूट्यूब चैनल पर खरीदे हुए व्यूअर्स नहीं, स्वयं के हैं।
बॉलीवुड में काम के सवाल पर उन्होंने कहा कि एक फिल्म के लिए गाना गाया है। अगर अनुकूल काम मिलेगा तो बॉलीवुड के लिए भी गायन करूंगा। अभी तक जो भी ऑफर हैं, अनुकूल नहीं लगे। अपने सभी गाने स्वयं लिखे हैं। गायन की शुरुआत पर उन्होंने कहा कि मेरे पिता धार्मिक गाने गाते थे, तो उन्हें सुनते हुए मेरे अंदर भी धर्म-अध्यात्म जगा। इसके बाद लिखने और गायन का सिलसिला शुरू हो गया।
Published on:
03 Mar 2020 07:05 pm

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