जबलपुर. प्रदेश में लागू होने वाले बिजली के नए टैरिफ के लिए मप्र नियामक आयोग ने मंगलवार को शक्तिभवन में जबलपुर रीजन के लिए जनसुनवाई आयोजित की। सुनवाई के बीच में जहां BJP workers ने घुसकर हंगामा किया, वहीं एक किसान नेता ने इसका boycott तक कर दिया। इतना ही नहीं आपत्तिकर्ताओं ने विद्युत कंपनियों पर भी कई आरोप लगाए। जबलपुर रीजन से कुल 20 आपत्तियां आयोग को भेजी गई थीं। जिसमें महज 18 आपत्तिकर्ता ही सुनवाई में पहुंचे। इस दौरान आयोग के अध्यक्ष देवराज विरदी और सदस्य मुकुल धारीवाल ने आपत्तिकर्ताओं की आपत्तियों को सुना।
राजनैतिक दलों की कठपुतली न बनें कंपनी
महाकौशल चेंबर ऑफ कॉमर्स के मानसेवी मंत्री शंकर नाग्देव ने कहा कि लोकसभा चुनाव के पूर्व जो याचिका दायर की गई थी, उसमें महज डेढ़ प्रतिशत वृद्धि की बात रखी गई थी, लेकिन पुनर्याचिका में इसे 12 प्रतिशत तक कर दिया गया। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियां राजनैतिक दलों के लिए नहीं बल्की उपभोक्ताओं के लिए है। चुनाव बाद कंपनियों ने पुराने वर्षों का घाटा पूरा करने के मकसद से टैरिफ में 12 से 28 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दे दिया, जो गलत है। यदि ऐसा होता है, तो प्रदेश का कारोबार भी पूरी तरह से तहस नहस हो जाएगा।
100 यूनिट बनाई जाए रियायती श्रेणी
लार्डगंज व्यापारी संघ के अध्यक्ष अखिल मिश्रा ने कहा कि प्रस्तावित टैरिफ याचिका में गैर घरेलू शोरूम, दुकान श्रेणी के उपभोक्ताओं पर अधिक भार पड़ेगा। टैरिफ याचिका के माध्यम से कंपनियों ने छोटे दुकानदारों की 50 यूनिट की रियायती श्रेणी की छूट समाप्त करने की साजिश की है। यदि ऐसा होता है, तो दुकानदारों पर 26 प्रतिशत तक का भार बढ़ जाएगा। जो पूर्णत: अव्यवहारिक है। उन्होंने 50 की जगह 100 यूनिट की रियायती श्रेणी बनाए जाने की मांग की है। यह भी कहा है कि दो किलोवॉट से ऊपर लोड वाले उपभोक्ता के लिए एलवी 2.2 मांग आधारित श्रेणी प्रस्तावित है, यदि बिना मीटर बदले इसे लागू किया गया, तो कंपनियां उपभोक्ताओं से नियत प्रभार जबरन वसूलेंगी।