जबलपुर. सिविक सेंटर में कीर्ति स्तम्भ तोडऩे की कार्रवाई के विरोध में जैन समाज ने शुक्रवार को कमानिया गेट पर धरना जारी रखा। वहीं पिसनहारी की मढिय़ा से जुलूस निकालकर विरोध दर्ज कराया। लोगों का कहना है कि जब तक प्रशासन उचित निर्णय नहीं करता तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। इसी कड़ी में जैन समुदाय के लोगों ने गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। समाज के लोग नगर निगम के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन दिया। दूसरी तरफ फुहारा और कमानिया क्षेत्र में इस घटना के विरोध में प्रतिष्ठानों को बंद रखा गया। समुदाय से जुड़े कुछ संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने बड़े फुहारा पर धरना दिया।
जैन समाज बुधवार शाम सिविक सेंटर में निर्माणाधीन कीर्ति स्तम्भ गिराने की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। गुरुवार सुबह भी जैन समाज के लोगों ने कमानिया, फुहारा क्षेत्र बंद रखा। समाज के लोग रैली के रूप में कलेक्ट्रेट जा रहे थे। इस दौरान घंटाघर में पुलिस ने लोगों को रोका व सीमित संख्या में कलेक्ट्रेट कार्यालय जाने की अनुमति दी। भीड़ को रोकने के दौरान टकराव की भी स्थिति निर्मित हुई। बाद में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मुलाकात की।
अनुमति दी फिर तोडफ़ोड़ क्यों
जैन पंचायत सभा के पदाधिकारियों का कहना था कि नगर निगम ने खुद निर्माण की अनुमति दी थी। निगम के अधिकारियों व तत्कालीन मंत्री की उपस्थिति में निर्माण तो आंदोलन तेज किया जाएगा। इस दौरान पंचायत के अध्यक्ष सतेन्द्र जैन, महामंत्री सनत जैन, मनीष जैन, संजय जैन, अनुराग गढ़ावाल, वीणा जैन, अमित पड़रिया मौजूद थे।
एसपी को सौंपा ज्ञापन
नगर निगम कर्मचारी परिषद और चालक संघ नगर निगम के तत्वावधान में बड़ी संख्या में गुरुवार को अधिकारी-कर्मचारी एसपी कार्यालय पहुंचे। एसपी अमित सिंह को ज्ञापन सौंपकर बताया कि बुधवार को सिविक सेंटर में अवैध निर्माण तोडऩे के दौरान कुछ लोगों द्वारा मारपीट, पत्थरबाजी करने और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचायी गयी। इस प्रकरण में निगम अधिकारी जीएस नागेश और संदीप अयाची के खिलाफ दर्ज एफआइआर वापस लेने की मांग की।
कलेक्टर ने दिया जांच का आश्वासन
धार्मिक स्थल निर्माण के मामले में भूमि आवंटन की प्रशासन से अनुमति जरूरी है। यह नहीं ली गई। इस बात से उन्हें अवगत कराया है। लेकिन, नगर निगम की अचानक कार्रवाई की जांच कराएंगे। यदि अवैध निर्माण है तो उसके लिए नोटिस और हिदायत देना चाहिए। मामले को प्रशासन के संज्ञान में लाना चाहिए।
– भरत यादव, कलेक्टर