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साध्वी ने साकार किया सर्वोत्तम धर्म, कैंसर पीडि़तों पर छलकता है इनका मातृत्व- देखें वीडियो

पीडि़त मानवता की सेवा को बनाया जीवन का लक्ष्य, वक्ताओं ने कहा- अनुकरणीय है संस्था का प्रयास  

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यहां बिना इंजेक्शन लगाए कैंसर के मरीज का दर्द हो जाता है दूर, गजब की है थैरेपी- देखें वीडियो

यहां बिना इंजेक्शन लगाए कैंसर के मरीज का दर्द हो जाता है दूर, गजब की है थैरेपी- देखें वीडियो

जबलपुर। परोपकार से बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है। पीडि़त मानवता की सेवा से बड़ा कोई सेवा कार्य नहीं है। वेदों में इनकी सेवा को नारायण की सेवा बताया गया है। विराट हॉस्पिस के माध्यम से साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी इस सेवा भावना को साकार कर रही हैं। उनके मातृत्व के मरहम में कैंसर पीडि़त अपना दर्द भूल जाते हैं। साध्वी के रुप में उनके प्रयास अनुकरणीय और वंदनीय है। विराट हॉस्पिस सेवा प्रकल्प के पांचवें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने कही। साध्वी ज्ञानेश्वरी इस सेवा प्रकल्प के माध्यम से विगत पांच वर्षों से कैंसर पीडि़तों का नि:शुल्क उपचार और सेवा कर रही हैं। साध्वी, मां, बहन और बेटी की तरह उनका भाव लोगों का कृतकृत्य कर देता है।

जगा रहीं जीने का जज्बा
विश्नोई ने कहा कि ऐसे मरीज जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, तीसरी व चौथी स्टेज में जहां उनके अपने भी साथ छोड़ देते हैं, ऐसी स्थिति में इन मरीजों को अपने पास रखकर उनका नि:शुल्क इलाज करना और उनमें जीने का जज्बा पैदा करना वाकई अनुकरणीय प्रयास है। हम सब को पीडि़त मानवता की सेवा के लिए आगे आना चाहिए। इस अवसर पर प्रो. ओमप्रकाश वर्मा, नरेश ग्रोवर, डॉ. केके कौल मौजूद थे।

सभी धर्मों का अंतिम लक्ष्य है सेवा
प्रो. वर्मा ने कहा, सभी धर्मों का अंतिम लक्ष्य सेवा ही है। सुश्री आरती मेहरा ने कहा, सत्य निष्ठा और संवेदनाओं के साथ जीवन को सार्थक करना ही विराट हॉस्पिस का संदेश है। पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा कि हॉस्पिस में उन्होंने करूणा को बहते हुए देखा है। यहां हर जीवन एक कहानी है और संवेदना से कष्ट कम हो रहे हैं। हॉस्पिस की प्रमुख साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने हॉस्पिस को जीवन के अंतिम दिनों में सतगति पूर्ण विदाई का उद्देश्य बताते हुए कहा कि परमार्थ सबसे बड़ी सेवा और आनंद है। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अखिलेश गुमास्ता द्वारा लिखी गई पुस्कत के हिन्दी अनुवाद का विमोचन किया गया।