
Cancer treatment machines
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में डेढ़ सौ करोड़ रुपए की लागत से बन रहे स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में मरीजों को जल्द आधुनिक उपचार मिलने की उम्मीद टूट रही है। इंस्टीट्यूट में कैंसर के बेहतर डायग्नोस और ट्रीटमेंट के लिए कई एडवांस मशीनें लगना है। इसमें ज्यादातर मशीनें विदेश से आएंगी। इनके आने में छह महीने तक का समय लगता है। सूत्रों के अनुसार सभी मशीनों की स्थापना के लिए प्रशासन ने अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इसमें यदि और देर हुई तो इस साल भी कैंसर इंस्टीट्यूट में मरीजों का उपचार प्रारंभ नहीं हो पाएगा।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का मामला
कस्टम ड्यूटी की राशि भी रिजर्व है
इंस्टीट्यूट में जरूरी उपकरणों के लिए 84 करोड़ रुपए से ज्यादा का प्रावधान है। मशीनों के आयात में परेशानी ना हो, इसके लिए पहले से बजट में लगभग 7 करोड़ रुपए रिजर्व रखे गए हैं। यह राशि विदेश से आने वाली मशीनों की कस्टम ड्यूटी और अन्य कर के भुगतान के लिए है। लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से कैंसर मरीजों को शहर में शीघ्र बेहतर इलाज की उम्मीद टूट रही है।
सबसे अहम है ये मशीन
इंस्टीट्यूट में तीन लीनियर एक्सेलेटर मशीनें लगना है। ये मशीनें कोबाल्ट की अत्याधुनिक तकनीक है। इसमें रेडिएशन कम मात्रा में होता है। इस कारण अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित है। तीन मशीन लगने से थैरेपी की प्रतीक्षा सूची भी कम हो जाएगी। अभी कोबाल्ट मशीन में प्रतिदिन 3-4 मरीज की थैरेपी हो पाती है।
ये महत्वपूर्ण मशीनें लगना हैं
●50 करोड़ रुपए से तीन लीनियर एक्सेलेटर मशीन
●8 करोड़ रुपए से लीनियर मशीन से संबंधित उपकरण
●6 करोड़ रुपए से सीटी सिमुलेटर मशीन की स्थापना
●5 करोड़ रुपए से गामा कैमरा व 20 लाख से सी आर्म
●85 लाख रुपए से मेमोग्राफी, डिजिटल एक्स-रे मशीन
●45 लाख रुपए से कलर डॉप्लर व अल्ट्रा साउंड मशीन
अभी कोबाल्ट सेये नुकसान
कैंसर अस्पताल में अभी कोबाल्ट मशीन से रेडिएशन दिया जाता है। इसकी पुरानी तकनीक के चलते कैंसर ट्यूमर के क्षेत्र से एक-दो सेंटीमीटर अधिक क्षेत्र में रेडिएशन होता है, जिसके कारण स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित होती हैं। मरीज को कमजोरी, खून की कमी, सूजन जैसी समस्या होती है।
भोपाल एम्स दौड़ रहे मरीज
लीनियर एक्सेलेटर मशीन में रेडिएशन के लिए मरीजों को भोपाल तक दौड़ना पड़ रहा है। अभी एम्स में लीनियर एक्सेलेटर मशीन चालू है। इसके अलावा किसी भी सरकारी अस्पताल में वर्तमान में लीनियर एक्सेलेटर से थैरेपी की सुविधा नहीं है। इस फेर में दौड़ भाग में थककर कई मरीज बीच में इलाज बंद कर देते हैं।
Published on:
28 Jul 2022 11:02 am
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
