
urban Ceiling
जबलपुर. दयानगर निवासी पटवर्धन परिवार ने कोरोनाकाल में मुखिया केवी पटवर्धन को खो दिया। सालों बीतने के बाद भी परिवार के लोग परेशान हैं। भवन का नामांतरण परिजनों के नाम पर नहीं हो पा रहा है। उनकी पत्नी सुमन पटवर्धन नामांतरण के लिए भटक रही हैं। जेडीए मुख्यालय से लेकर तहसील कार्यालय में उन्हें जवाब मिलता है कि शहरी सीलिंग में होने के कारण जमीन का नामांतरण नहीं हो सकता।
- शहरी सीलिंग से पीड़ित दयानगर कॉलोनी के बुजुर्गों का दर्द
- सिस्टम के प्रति नाराजगी, कलेक्टर से मिलकर रखा पक्ष
- कोरोना में पति को खोया, अब बेटों के नाम घर के अंतरण में बाधा
शहरी सीलिंग पीड़ित जेडीए की कालोनियों के रहवासी सोमवार को बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर एसके सुमन के समक्ष अपनी मांग रखीं। जेडीए आवासीय कल्याण महासंघ के अध्यक्ष विनोद दुबे ने कहा कि 22 कालोनियों के निवासी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। कॉलोनीवासियों ने कलेक्टर से ज्ञापन में जेडीए की कॉलोनियों को सीलिंग मुक्त करने की मांग रखी। जेडीए आवासीय कल्याण महासंघ के केएल चोपड़ा, दिलीप नेमा, एसके श्रीधर, मदन दुबे ने बताया कि लंबे समय तक संघर्ष के बाद विकास प्राधिकरण से भू-भाटक प्रथा समाप्त करने की कार्यवाही हो सकी।
वर्ष 2019 में तत्कालीन कलेक्टर ने जेडीए की कॉलोनियों को सीलिंग प्रभावित कैफियत के कॅालम 12 में दर्ज करा दिया। इसके कारण हजारों की संख्या में भवन स्वामियों के खसरे सीलिंग से प्रभावित हो गए। इस दौरान रजत राय, नितिन यादव, प्रशांत मिश्रा, सच्चिदानंद शेकटकर, आरएस पांडे, प्रवीण विश्वकर्मा, दिलीप नेमा मौजूद थे।
हस्तक्षेप की गुहार
शहरी सीलिंग के मामले नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि जेडीए की कॉलोनियों के रहवासियों को न तो नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर मिला, फिर भी उनके प्लाट-भवन शहरी सीलिंग के मद में दर्ज कर दिए गए।
सरकारी कार्यालयों के काट रहे चक्कर
सुमन पटवर्धन अकेली नहीं हैं, उनकी तरह कॉलोनी के अन्य बुजुर्ग भी अपनी संपत्ति बेटा-बेटी के नाम हस्तांतरित करने के लिए सरकारी कार्यालयों में भटक रहे हैं। ऐसे कई परिवार हैं जिन्होंने कोरोनाकाल में किसी अपने को खो दिया, लेकिन उनका घर जेडीए की कालोनी में होने के कारण जमीन शहरी सीलिंग मद में दर्ज कर दिए जाने से भवन का नामांतरण नहीं करा पा रहे हैं। इसे लेकर पीड़ितजनों में नाराजगी है।
41 साल पहले कॉलोनी का हुआ था विकास
जेडीए की सबसे पुरानी कालोनियों में शामिल दया नगर कालोनी चार दशक पहले विकसित की गई थी। उस समय कर्मचारियों, व्यापारियों से लेकर नगर के अन्य वर्ग के लोगों ने यहां प्लाट खरीदे थे। अब ये इलाका रिहायशी के साथ ही सेमी कमर्शियल में तब्दील हो गया है। कालोनी में बड़े टॉवर खुल गए हैं, जिनमें कोचिंग व दुकान संचालित हो रही हैं। इस क्षेत्र में जमीन का बाजार मूल्य 15-20 हजार रुपये वर्गफीट तक पहुंच चुका है।
हजारों की संख्या में आबादी निवासरत
दया नगर में ज्यादातर भवन दो हजार से लेकर ढाई हजार वर्ग फीट के हैं। इनमें बहुमंजिला भवन बन चुके हैं, इन भवनों में हजारों की संख्या में लोग निवासरत हैं। जमीनका नामांतरण नहीं होने के कारण इन सभी कॉलोनीवासियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
Published on:
05 Sept 2023 11:39 am
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