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इस महिला ने बेटे की खातिर रोशन कर दी अंधेरी बस्ती- देखें वीडियो

देखते ही देखते वहां दर्जनों नन्हे तारे शिक्षा और ज्ञान की रोशनी से दमकने लगे

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Celebrate International Women's Day on March 8 2018

Celebrate International Women's Day on March 8 2018

जबलपुर। मां की आंखों के दो तारे, चमकते, दमकते और मुस्कुराते थे। हर पल हर सांस में बस उनकी खुशियां होती थीं। किंतु काल को शायद कुछ और ही मंजूर था, एक तारा अचानक अस्त हो गया, ऐसा लगा मानो मां की दुनिया ही उजड़ गई हो, जबकि उसने अपने इस तारे की दुनिया में परी लाने की तैयारियां कर रखीं थीं। सपने संजोए थे कि परी और तारा दोनों आंगन में दमकेंगे। पर ऐसा न हो सका। तारा तो बहुत कहीं बादलों में गुम हो चुका था।
गम में डूबी मां ने हिम्मत न हारते हुए उसकी याद में ऐसा काम शुरू किया कि ज्ञान के प्रकाश से दूर अंधेरे में डूबी बस्ती में शिक्षा के उजियारे से रोशन कर दिया। फिर देखते ही देखते वहां दर्जनों नन्हे तारे शिक्षा और ज्ञान की रोशनी से दमकने लगे। मां को भी अपने खोए तारे की दमक इन तारों में दिखाई देने लगी।

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महिला दिवस पर हम आपको एक ऐसी मां से परिचित करा रहे हैं जो अपने बेटे की याद में गरीब, बेसहारा और कमजोर वर्ग के बच्चों को ज्ञान के प्रकाश पुंज बनाने में दिन रात लगी है। जबलपुर निवासी अंजू भार्गव का एक बेटा कुछ साल पहले दुनिया से दूर चला गया। इसके बाद दुखी मां ने बेटे की याद में गरीब बच्चों को शिक्षा देने का संकल्प किया और एक नि:स्वार्थ, नि:शुल्क स्कूल खोल दिया। जिसमें पहले तो बच्चे आते नहीं थे। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लोगों को शिक्षा का महत्व बताया। आज जिनके मां बाप ने कभी एक किताब नहीं खोली, उनके बच्चे फर्राटेदार हिंदी इंग्लिश में बातें करते हैं। उनकी हर जरूरत को अंजू भार्गव पूरा करती हैं। इसके अलावा उन्होंने गरीब महिलाओं के लिए एक स्वयंसेवी संस्था भी बनाई है जो उन्हें घरेलू रोजगार उपलब्ध कराती है।

बच्चों को साक्षर बनाना ही हमारा उद्देश्य
गरीब बच्चों को बालश्रम से निकालकर उन्हें साक्षर बनाना ही हमारा उद्देश्य है। पारिवारिक अज्ञानतावश निचली बस्ती में रहने वाले बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। बच्चे बालश्रम करते हैं। एेसे परिवारों के बच्चों को हम मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं ताकि उनका भविष्य उज्जवल बनें। यह कहना है अंजू भार्गव का। भार्गव कहती हैं कि बालश्रम कर रहे बच्चों को पढ़ाई की ओर मोडऩा कठिन कार्य है। हमने रानीताल श्मशान के समीप बस्ती चुनी है, जिसमें शुरूआत में काफी दिक्कत आई। परिवार के लोग बच्चों को पढ़ाने से बेहतर काम करना बेहतर मानते थे लेकिन करीब एक वर्ष में स्थिति यह बन गई कि अब हम करीब ४५ बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। बच्चों के लगातार आने से अब बस्ती में अन्य परिवारों के बच्चे भी हमसे जुड़ रहे हैं।

अभी ये हाल
बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा
अध्ययन के लिए दो शिक्षक
रविवार को विशेष क्लास
त्यौहारों में उपहार व कपड़े वितरण
समय समय पर अन्य आयोजन

कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के जरूरतमंद बच्चों को हम नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं। शिक्षा के साथ उन्हें स्टेशनरी और बुक्स भी देते हैं। हमारा उद्देश्य हर हाल में बच्चों को शिक्षित
करना है।
- अंजू भार्गव, अध्यक्ष, लक्ष्मी सरोकार समिति

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