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प्रवेश में गड़बड़ी तो आयुष कॉलेजों पर लगेगा एक साल का प्रतिबंध

सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी और इंडियन मेडिसिन कर रहा कवायद

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Medical exam in Hindi in MP, big decesion for medical students

Medical exam in Hindi in MP, big decesion for medical students

जबलपुर. आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी कॉलेज में एडमिशन में हेराफेरी करना कॉलेजों को भारी पड़ सकता है। प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी पर अंकुश लगाने के लिए सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी और सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन मान्यता प्रावधान को सख्त करने जा रही है। निर्धारित सीटों से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिए जाने पर संबंधित कॉलेज की मान्यता रद्द की जाएगी। कॉलेज को एक साल के लिए बैन भी किया जा सकता है। ये प्रस्ताव निजी आयुष कॉलेजों में तय सीटों से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिए जाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद बनाए जा रहे हैं। नए नियम इसी सत्र से लागू करने की तैयारी है।

नीट के बाद एकरूपता
प्रदेश में सत्र 2018-19 से एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीएनवाइएस सभी में प्रवेश नेशनल एलीजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के जरिए हो रहे हैं। सभी चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए एक जैसा एंट्रेंस टेस्ट होने के बाद प्रवेश में गड़बड़ी पर कार्रवाई के प्रावधानों में भी एकरूपता की मांग हो रही है।

पहले बन चुकी है सहमति
प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में मान्य से अधिक सीटों पर छात्र-छात्राओं को प्रवेश का मामला सामने आ चुका है। इसे रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संबंधित कॉलेज पर प्रतिबंधात्मक और दंडात्मक कार्रवाई का सुझाव दिया है। इसे मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया स्वीकार कर चुकी है। आयुष मंत्रालय के प्रावधान को लेकर सैद्धांतिक सहमति देने से कार्रवाई का ड्राफ्ट तैयार करने का रास्ता खुल गया है।

16 मेडिकल और 15 डेंटल कॉलेज प्रदेश में संचालित
54 आयुष कॉलेज (बीएएमएस, बीएचएमएस व अन्य)
03 आयुष कॉलेज शहर में (1 आयुर्वेद, 2 होम्योपैथी)

कॉलेजों में तय सीटों से अधिक पर प्रवेश देने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध कार्रवाई के लिए सख्त नियम प्रस्तावित जाने की बात कही जा रही है। नए सत्र से प्रावधान लागू होने की संभावना है। यह नियम छात्रों के हित में हैं।
डॉ. राकेश पाण्डेय, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आयुष मेडिकल एसोसिएशन