
औषधियों का खजाना है हमारा मुकुंदरा
कोटा. चंबल का किनारा और हाड़ौती के जंगल जड़ी-बूटियों और वन औषधियों के लिहाज से भी समृद्ध है। मुकुन्दरा की वादियों में आसपास के जंगल और चम्बल क्षेत्रों में औषधियों की भरमार है। इन जंगलों में 10 साल तक हुए शोध में 350 तरह की दर्लभ औषधियां मिली हैं। कोटा के दाउदयाल जोशी आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी चन्द्रेश तिवारी ने यह अध्ययन किया।
घुमाव पर पलटी एम्बुलेंस, प्रसूता थी सवार
डॉ. तिवारी ने कोलीपुरा, भैसरोडगढ़़, गोपालपुरा, सेटल डेम,पाडाझर, इकलिंगपुरा, दरा, गेपरनाथ, शाहबाद, नाहरगढ़ समेत आस पास के इलाकोंं में ये जड़ी-बूटियां खोजी हैं। खास बात यह कोटा समेत हाड़ौती भर पर दो-तीन साल से काल बनकर टूट रहे डेंगू, स्क्रब टायफस और स्वाइन फ्लू से ये जड़ी-बूटियां बखूबी लड़ सकती हैं। डॉ. चन्द्रेश जिला स्तरीय आयुर्वेदिक औषधालय में मोबाइल चिकित्सा यूनिट के प्रभारी हैं। वे योग गुरु बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण के साथ लंबे समय तक अनुसंधान वैज्ञानिक के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं।
ऐसा है भंडार
अति दुर्लभ वनोषधियां रक्त महाद्रोणी (यह सिर्फ चंबल क्षेत्र में ही पायी जाती है), महापिण्डीतरु, वृक्षादनी, तवक्षिर,कंटकी पलाश, गजकर्णी, विशाला, रक्त अतिबला, श्वेत पलाश, कृष्ण चित्रक, श्वेत चूड़ामणी, भगलिंगी, वृहद् गोरखमुंडी, वृहद् कृष्णभृंगराज, श्वेत अपराजिता, धनुजिव्हा, श्वेत कंटकारी, केवुककंद,अर्कपुष्पी, कपित्थपत्री, श्वेत शरपूंखा, अत्यम्लपर्णी, लता कांचनार, ब्रह्मादंडी, हस्तीकर्णपलाश, सुगंधबाला, विष्णुक्रांता, गंधवृक्षक, जीवन्ती, कृष्णधतुर आदि अति दुर्लभ हैं।
200 से अधिक दुर्लभ
विजय सार, सिंधुवार, मयूरशिखा, तिनिश, मेष शृंगी, गुग्गुल, सारिवा, त्रिकोषकी, वृहद् शतावरी, श्वेत व कृष्ण मूसली, अश्वगंधा, सुकंदी, वरुण, आवर्तकी, ताम्रपुष्पी, घुणप्रिया,अग्निशिखा, गंभारी, इरिमेद, वृश्चिककाली, वत्सक, श्रुतिस्फोटा, शिवलिंगी, अग्निमंथ, कम्पिलक, शालपर्णी, रक्तएरंड, व्याघ्र एरंड समेत करीब 200 दुर्लभ औषधियां हैं।
यह है दशमूल
आयुर्वेद में दशमूलों से ही 60 से 70 तरह की औषधियां तैयार की जाती हैं। वृहद् पंचमूल और लघु पंचमूल से मिलकर दशमूल बनता है। वृहद् पंचमूल में श्योनाक, गंभारी, अग्निमंथ, पाटला, और बिल्व आते हैं, वहीं लघु पंचमूल में शालपर्णी, प्रश्निपर्णी,बड़ी व छोटी कंटकारी, गौक्षुर आते हैं।
हाड़ौती के जंगल समृद्ध है। मैंने विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन किया। आयुर्वेद में महत्वपूर्ण दशमूल यहां पर मौजूद हैं। इन्हें संरक्षण मिले तो गंभीर रोगों के इलाज में कारगर साबित हो सकता है। कई औषधियां तो ऐसी हैं जो अन्यन्त्र कम ही देखी जाती हैं।
डॉ. चन्द्रेश तिवारी
रोग और निदान
डेंगू : नागजीह्वा, किरातत्तित्त, रक्तमहाद्रोणपुष्णी, सुगंधबाला।
चिकनगुनिया : वसंतदुती, असन गजवल्लभा।
स्क्रब टायफस : पटोल, कुबेराक्ष, मूषाकर्णी।
स्वाइनफ्लू : कंटकारी, अमृता, इन्द्रायण।
शक्तिवर्धक : मूसली, शतावरी, अश्वगंधा, बला अतिबला महाबला, नागबला।
स्मृतिवर्धक : ब्राह्मी, मंडूकपर्णी, बुद्धिवर्धक ज्योतिष्मती, शंखपुष्पी।
ह्रदय रोग : अर्जुन, सादड़।
मूत्र व किडनी रोग : गोक्षुर, पुनर्नवा, काकजंघा।
चर्म रोग : नक्तमाल, कंटकी करंज, चिरबिल्व।
नेत्ररोग : मत्याक्षी
जोड़ व कमर दर्द : मुस्तक निर्गुण्डी, गुग्गुल।
रक्तशोधन : सारिवा, खदिर
हड्डी रोग : हडजोड़।
मधुमेह : विजयसार, वन्यजम्बू, काकमाची।
अतिसार : कुटज, मरोडफ़ली, बिल्व।
खांसी : वासा, तवक्षिर, वंशलोचन
एलर्जी : भूमिआमलकी, वन्यहरिद्रा।
पीलिया : शरपूंखा।
बालों का झडऩा व गंजापन : भृंगराज, आमलकी।
नपुंसकता : वाराही कंद, विदारीकंद, गजकंद।
पाइल्स : सुरणकंदमुख।
Published on:
07 Aug 2018 03:25 pm
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