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चमत्कारी शिव पिंडी कैलाश धाम की, दर्शन मात्र से होती है मनोकामना पूर्ति- देखें वीडियो

कैलाशधाम नाम पडऩे के पीछे यहां मौजूद सफेद शिव पिंडी है। जो प्राकृतिक रूप से निर्मित व बहुत ही आकर्षक है

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कैलाश धाम

कैलाश धाम

लाली कोष्टा@जबलपुर। कैलाशवासी देवाधिदेव महादेव को भोले नाथ ऐसे ही नहीं कहा जाता है। वे हर रूप, हर स्थान में मौजूद हैं। उनके विविध रूपों को मानने वालों की हर मुराद पूरी करते हैं। एक ऐसा ही शिव मंदिर संस्कारधानी जबलपुर में मौजूद है, जिसे कैलाश धाम के नाम से जाना जाता है।
इसे कैलाशधाम नाम पडऩे के पीछे यहां मौजूद सफेद शिव पिंडी है। जो प्राकृतिक रूप से निर्मित व बहुत ही आकर्षक है। ऐसा माना जाता है कि यहां पहुंचने वाले की हर मुराद भगवान शंकर पूरी करते हैं। हरी भरी वादियों के बीच ऊंची पहाड़ी पर विराजमान महादेव का जलाभिषेक करने हजारों की संख्या में कांवडिय़े हर साल पहुंचते हैं।

ऐसे हुई खोज
मंदिर के सेवक रामू दादा के अनुसार पहाड़ी पर खुले आसमान के नीचे सफेद पत्थर की शिव पिंडी कई सदियों पुरानी है। यहां चरवाहे ही आया करते थे। 1985 में जब वे यहां दर्शन को आए तो यहीं के होकर रह गए। इसकी महिमा पहले भी ग्रामीणों से सुनते आए थे। सफेद पिंडी होने से इस पहाड़ी को कैलाश धाम नाम मिला। इस पिंडी की खासियत है कि इसके दर्शन करने से मानसिक शांति मिलती है, साथ की मनोकामनापूर्ति के लिए भी यह शिव मंदिर प्रसिद्ध है।

शिव महिमा का जीवंत उदाहरण कैलाश धाम
नर्मदा मिशन के संस्थापक समर्थ भैयाजी सरकार यहां दस वर्ष पूर्व अपने एक अनुयायी के साथ पहुंचे थे। वे बताते हैं कि जब यहां आया तो पहाड़ी का पूरा जंगल नष्ट हो चुका था, कांक्रीट की अवैध खुदाई जोरों पर थी। लेकिन एक संकल्प शिव से प्राप्त हुआ और संस्कार कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई। इस कांवड़ यात्रा में शामिल भक्त एक कांवड़ में पौधे और दूसरे में नर्मदा जल लेकर पहाड़ी तक आते हैं। फिर ये पौधे यहीं रोप दिए जाते हैं। नतीजतन दस वर्षों में पहाड़ी पर करीब 6 हजार पौधे पेड़ बनकर एक बार फिर कैलाशधाम की हरियाली और शिव की प्रसन्नता बताने लगे हैं। यहां सच्चे मन से आने वालों की हर मुराद पूरी होती है।