
chandan ke fayde aur nuksan
जबलपुर। नर्मदा तटों पर लगने वाला हर पेड़ वैसे तो बहुत कारगर होता है, लेकिन यहां लगने वाला चंदन अपने आप में अलग पहचान रखता है। इस चंदन की पूरी दुनिया में खासी डिमांड है। यही वजह है कि यहां के चंदन पर तस्करों व चोरों की ज्यादा नजर रहती है। इसे पाने के लिए वे हर कीमत चुकाने के लिए तैयार रहते हैं। वहीं सरकारी उदासीनता से भी इसकी चोरी नहीं रुक रही है।
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तस्करी लील गई नर्मदा के तटवर्ती इलाके के चंदन पेड़
राज्य वन अनुसंधान संस्थान से हो रही अवैध कटाई
नर्मदा के तटवर्ती इलाके में चंदन के पेड़ गायब हो गए हैं। बहुत कम स्थानों पर चंदन के पेड़ उग रहे हैं, वे भी तस्करों के निशाने पर हैं। चंदन के पेड़ों की सुरक्षा में फिसड्डी वन विभाग ने अनुकूल जलवायु के बावजूद नर्मदा तट को चंदन वन से आच्छादित करने की कोई पहल नहीं की।
जानकारों के अनुसार ग्वारीघाट, भेड़ाघाट, तिलवाराघाट के साथ राज्य वन अनुसंधान संस्थान पोलीपाथर एवं ऊष्ण कटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान परिसर में जो चंदन के पेड़ थे, वे चोरी होते गए। राज्य वन अनुसंधान संस्थान में 20 दिन पहले ही चंदन के पेड़ों पर आरी चली थी। वहां के ठूंठ से निकली चंदन की नई शाखाएं इशारा कर रही हैं कि वर्षों से तस्करी हो रही है। पिछले वर्ष ऊष्ण कटिबधीय वन अनुसंधान संस्थान में चंदन के आधा दर्जन पेड़ चोरी होने का मामला सामने आया था।
वन विभाग द्वारा चंदन का पौधरोपण नहीं किया गया है, इस कारण विभाग में इसके सम्बंध में कोई रेकॉर्ड नहीं है। ऊष्ण कटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान (टीएफआरआइ) ने परिसर में चंदन के पेड़ों की गणना शुरू की है।
काटे गए 200 पेड़
जानकारों के अनुसार राज्य वन अनुसंधान संस्थान एवं आसपास के क्षेत्रों में पांच वर्ष में चंदन के 200 से अधिक पेड़ अवैध रूप काटे गए हैं। संस्थान के डीडीओ आरसी गुप्ता ने बताया, चंदन के तीन पेड़ों को काटे जाने के मामले की जांच की जा रही है। वहीं रिटायर रेंजर एबी मिश्रा ने कहा कि चंदन के बीज में उगने की क्षमता अच्छी होती है।
नर्मदा के तटवर्ती के इलाके में चंदन वन के अनुकूल जलवायु है। सागौन और अमलताल के पेड़ों के बीच लाल चंदन के 1000 पौधे लगाए जाएंगे। चंदन के पेड़ों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा।
- डॉ. एम कालीदुरई, मुख्य वन संरक्षक, जबलपुर
Published on:
18 Dec 2018 02:04 pm
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