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जबलपुर। नर्मदा जल कं चन हो गया है। जबलपुर की आबोहवा फिर से खुशनुमा हो गई। विचलित करने वाले कानफ ोड़ू कोलाहल से भी राहत मिली। विशेषज्ञों के अनुसार लॉक डाउन प्रकृ तिक को नैसर्गिक स्वरूप लौटाने के लिए वरदान साबित हुआ है। मानवीय दखल न होने से पर्यावरण का रूप रंग पूरी तरह से बदला नजर आ रहा है। इसे हर कोई महसूस कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जल, वायु व ध्वनि प्रदूषण पर जारी होने वाली रिपोर्ट भी इस सच्चाई को बयां कर रही है। ऐसे में पर्यावरणविदें का मानना है कि अब सबकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि प्रकृति से छेड़छाड़ न करें।
लॉक डाउन से पर्यावरण को ऐसे हुआ लाभ
जांच रिपोर्ट जनवरी में (मिलीग्राम प्रति लीटर)
कं टेट, मानक, मौजूदगी
बीओडी(बायो ऑक्सीजन डिमांड), 1, 2.8,
पीएच, 6.5 से 8.5,8.9
डीओ(डिजॉल्व ऑक्सीजन लेवल),6,8
टोटल कोलीफार्म, 50-100,990
टोटल हार्डनेस,250,1050
जांच रिपोर्ट फरवरी में(मिलीग्राम प्रति लीटर)
कं टेट, मानक, मौजूदगी
बीओडी(बायो ऑक्सीजन डिमांड), 1, 2
पीएच, 6.5 से 8.5,7.6
डीओ(डिजॉल्व ऑक्सीजन लेवल),6,7.6
टोटल कोलीफार्म, 50-100,48
टोटल हार्डनेस,250,120
जांच रिपोर्ट मार्च में (मिलीग्राम प्रति लीटर)
कं टेट, मानक, मौजूदगी
बीओडी (बायो ऑक्सीजन डिमांड), 1, 1.6
पीएच, 6.5 से 8.5,8.29
डीओ (डिजॉल्व ऑक्सीजन लेवल),6,7.4
टोटल कोलीफार्म, 50-100,25
टोटल हार्डनेस,250,124
अप्रैल के अंत व मई की जांच रिपोर्ट (मिलीग्राम प्रति लीटर)
कं टेट, मानक, मौजूदगी
बीओडी (बायो ऑक्सीजन डिमांड), 1 से कम, 0.7 से 0.8
पीएच, 6.5 से 8.5,8.12
डीओ (डिजॉल्व ऑक्सीजन लेवल),6,7.12
टोटल कोलीफार्म, 50-100,22
टोटल हार्डनेस,250,170
ए श्रेणी में है नर्मदा जल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मासिक रिपोर्ट से लेकर सालाना रिपोर्ट के अनुसार नर्मदा जल ए श्रेणी में है। नर्मदा के जल स्तर की गुणवत्ता की स्थिति सुधरी है। तटों में पहले के मुकाबले प्रदूषण कम हुआ है।
एयर क्वालिटी
मानक (एक्यूआई)
-0 से 50 अच्छी
-51 से 100 संतोषजनक
-101 से 200 मध्यम
-201 से 300 पुअर
-301 से 400 वेरी पुअर
-401 से 500 सीवियर
एक्यूआई यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स
वायु गुणवत्ता में इस प्रकार आया बदलाव
-मार्च में एक्यूआई-189
-अप्रैल में एक्यूआई-70
-मई में एक्यूआई-55 से 60
ध्वनि प्रदूषण की स्थिति
एसपीएल(साउंड प्रेशर लेवल डेसिबल में)
मानक(55 डीबी दिन में, 45 डीबी रात में)-
ये रही स्थिति
-मार्च में 60 डीबी तक
-अप्रैल में 40 डीबी तक
-मई में 40 से 42 डीबी तक
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. एसके खरे ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान कल-कारखाने बंद थे, जलस्रोतों से लेकर ज्यादातर स्थानों पर मानवीय दखल नहीं था। पर्यावरण को बड़ा लाभ हुआ है। सैम्पल जांच की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि नर्मदा जल की गुणवत्ता और बेहतर हुई है। वायु गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। इसके साथ ही लॉक डाउन के दौरान ध्वनि प्रदूषण का स्तर पर भी काफी कम हुआ।
Published on:
05 Jun 2020 11:10 pm
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