
Coal stock shortage
जबलपुर। बिजली कंपनी में कोयले का संकट लगातार बना हुआ है। बिजली कंपनी भले ही कोयले की आपूर्ति को बढ़ाने का दावा कर रही हो लेकिन हालात यह है कि आपूर्ति में इजाफा नहीं हो पा रहा है। एक पखवाड़े के दौरान स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। हालात यह है कि बिजली ताप गृहों में कोयले की खपत रोजाना 80 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। जबकि बिजली घरों में 1.5 से 3 दिनों का कोल स्टॉक शेष बचा है। जो कोयला आ भी रहा है तो रोजाना के बिजली उत्पादन में ही खर्च हो जा रहा है। बिजली कंपनी ने उत्पादन की स्थिति को बनाए रखने के लिए गांवों में शेड्यूल कटौती कर रही है।
पावर प्लांटों में 80 हजार मीट्रिक टन पहुुंची कोयले की खपत
बिजली घरों में डेढ़ से तीन दिन का बचा कोल स्टॉक, बिजली की मांग बढ़ने के साथ बढ़ी कोयले की खपत
बिजली प्लांटों की स्थिति
संजय गांधी ताप विद्युत गृह
कोयला स्टॉक- 31,700 मीट्रिक
कोयला खपत-22,500मीट्रिक
उपलब्धता-डेढ़ दिन
सारणी ताप विद्युत गृह
कोयला स्टॉक-40,600 मीट्रिक टन
कोयला खपत-18200 मीट्रिक टन
उपलब्धता- ढाई दिन
श्री सिंगाजी पावर प्लांट
कोयला स्टॉक-1,45,500 मीट्रिक टन
कोयला खपत-36,300 मीट्रिक टन
उपलब्धता-करीब चार दिन
अमरकंटक पावर प्लांट
कोयला स्टाक-52,100 मीट्रिक टन
कोयला खपत- 28,000 मीट्रिक टन
उपलब्धता-18 दिन
2.75 टन कोयला उपलब्ध
प्रदेश के बिजली प्लांटों में 2,75,800मीट्रिक टन तक कोयला उपलब्ध है। जबकि प्रतिदिन की खपत 79 हजार 800 मीट्रिक टन बताई जाती है। इस लिहाज से प्रदेश में 3.5 दिन का कोयल शेष बताया जाता है। बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है लेकिन उस गति से स्टॉक में बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है।
13 फीसदी ही मौजूदा स्टॉक
जानकारों के अनुसार बिजली घरों में नियमानुसार कोयला का 26 दिन का स्टॉक होना चाहिए। लेकिन बिजली घरों में अपनी क्षमता का मात्र 13 फीसदी स्टॉक ही उपलब्ध है। यदि देखा जाए तो करीब 50 से 60 लाख टन कोयला का एडवांस स्टॉक होना आवश्यक है। फिलहाल जो कोयला आ रहा है वह पूर खर्च बिजली उत्पादन में हो जा रहा है। बिजली कंपनी ने आगे की जरूरतों को देखते हुए सड़क मार्ग से भी कोयले की आपूर्ति की व्यवस्था की है तो वहीं कोयला का एक्सपोर्ट करने का निर्णय लिया गया है।
Published on:
21 May 2022 12:04 pm
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