
Agricultural University
Agricultural University : कृषि विश्वविद्यालय ने युवाओं और किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नई पहल की है। मोटे अनाजों की मिलिंग और प्रोसेसिंग विवि परिसर में ही होगी। इसके साथ युवाओं को आधुनिक मशीनों पर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मिलिंग यूनिट की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य मोटे अनाजों से अधिकतम लाभ प्राप्त करना है। यह पहल किसानों को एक एक नया अवसर प्रदान करेगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मोटे अनाजों के उपयोग को बढ़ावा देने में यह कदम सहायक होगा।
यूनिट में मोटे अनाज की सफाई से लेकर पॉलिशिंग तक की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। इससे अनाज की गुणवत्ता खराब नहीं होगी। अभी जिले के ग्रामीण अंचलों में इसकी व्यवस्था नहीं है। किसानों को हाथ से अनाज की दराई करना पड़ती है। इससे दाना भी खराब होता है। कृषि वैज्ञानिकों की एक टीम मार्केटिंग और पैकेजिंग के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करेगी। इससे किसानों को उत्पादों को बाजार में सही तरीके से पेश करने में सहायता मिलेगी।
कृषि विश्वविद्यालय फूड साइंस विभाग की मदद से कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा से कुकीज, ब्रेड और टोस्ट, पास्ता जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। प्रतिदिन 40 से 50 किलो उत्पाद तैयार होते हैं। युवाओं और किसानों को मोटे अनाज को कैसे बाजार में बेचे, किस तरह से इसकी पैकेजिंग की जाए इसके लिए दिल्ली की संस्था के साथ ही मार्केटिंग एक्सपर्ट प्रशिक्षण देते हैं। प्रदेश के बाहर के भी युवाओं और समूहों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
मिलिंग और प्रोसेसिंग यूनिट तैयार करने का मुख्य उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। किसानों को मोटे अनाज की पैदावार बढ़ाने के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी। वे अपने उत्पादों को न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बेच सकेंगे।
Published on:
20 Sept 2024 01:27 pm
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