
command and control center
जबलपुर. दमोहनाका में करोड़ों की लागत से बना हाईटेक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कट्रोल सेंटर चंद विभाग और उनकी सेवाओं से ही जुड सका है। फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, जलापूर्ति व्यवस्था, शहर के किसी इलाके में जाम की स्थिति में रूट डायवर्सन का अनाउंसमेंट, ग्रीन कॉरिडोर बनाना जैसी सेवाएं भी सेंटर से अब तक नहीं जोड़ी गई हैं। 8 सर्वर, 6 सौ टीबी का स्पेस, 20 वर्क स्टेशन और 30 लैंडलाइन जैसी हाईटेक सुविधाओं के बावजूद किसी आपराधिक वारदात की स्थिति में सुरक्षा के मद्देनजर सेंटर के माध्यम से नगर के चारों ओर जांच के लिए वर्चुअल घेराबंदी का सिस्टम भी तैयार नहीं हो सका है।
स्मार्ट सिटी के तहत विभागों के बीच समन्वय बनाकर सेंटर का ठीक ढंग से उपयोग किया जा सकता है। ये सेंटर कोरोना की दोनों लहर के दौरान कोरोना के मरीजों की निगरानी, उन्हें अस्पतालों में बेड की उपलब्धता की जानकारी मुहैया कराने से लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से टेली मेडिसिन सुविधा देने में बहुत मददगार रहा था। सेंटर से कचरा वाले वाहनों की ट्रेकिंग, मेट्रो बसों की रूटवार निगरानी, सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की निगरानी और इंटीग्रेटेड ट्रेफिक मैनेजमेंट सिस्टम(आईटीएमएस) के माध्यम से चौराहों में नियम तोड़ने वालों निगरानी व चालान की सेवाएं ही जुड़ी हैं।
ये था उदश्य
हाईटेक सेंटर की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सभी विभागों के डाटा को लिंक कर ऑटोमेटिक डेटा एनालिसिस करना, इमरजेंसी सेवाओं को जोड़कर त्वरित सेवाएं देना व रेस्पांस टाइम को कम करना है। आई ट्रीपलसी में डाटा एडमिनिस्ट्रेटर, नेटवर्क एक्सपर्ट, एडमिनिस्ट्रेटिव सपोर्ट ऑपरेटर की पूरी टीम है। आवश्यकता के अनुपात में इसे बढ़ाया भी जा सकता है।
यह है स्थिति
25 करोड़ की लागत से स्थापित
05 करोड़ रुपए से बना भवन
05 हजार वर्गफीट में है पूरा सेटअप
25 लोगों की टीम है सेंटर में
10 लोग आईटीएमएस के लिए
इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में उपलब्ध संसाधन व दी जा रही सेवाओं की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही अन्य विभागों की इमरजेंसी सेवाओं को भी सेंटर से जोडा जा सके, इस दिशा में आवश्यक पहल करेंगे।
- डॉ. इलैयाराजा टी, कलेक्टर
Published on:
15 Sept 2022 10:39 am
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