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थ्रीडी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से दूर की दो माह के बच्चे की जन्मजात विकृति

मेडिकल कॉलेज में सफल ऑपरेशन : प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल में इस तकनीक से बच्चे की पहली सर्जरी

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3D laparoscopic surgery

3D laparoscopic surgery

जबलपुर. नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में शनिवार को दो माह के एक बच्चे के ऑपरेशन में थ्रीडी लेप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल कर जन्मजात बड़ी विकृति को दूर किया गया। किसी बच्चे की सर्जरी में थ्रीडी तकनीक का उपयोग मेडिकल कॉलेज में पहली बार हुआ है। इसकी सफलता से बच्चों की सर्जरी को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। दावा किया जा रहा है कि प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल में बच्चे की पहली बार थ्रीडी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई है।

पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. विकेश अग्रवाल के अनुसार कटनी निवासी दो माह के बच्चे में जन्म से मलद्वार नहीं था। थ्रीडी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से बच्चे का नया मलद्वार बनाया गया। जन्मजात विकृति के कारण पहले उसके पेट से मल निकासी का अस्थाई मार्ग बनाया गया था। सर्जरी टीम में डॉ. अग्रवाल के साथ डॉ. हिमांशु आचार्य, डॉ अभिषेक तिवारी, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. दिनेश, डॉ. आर. कोल एवं डॉ. देवेश ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आधुनिक मशीन, थ्रीडी चश्मे का सहारा
विशेषज्ञों के अनुसार थ्रीडी सर्जरी 3 डी एनीमेशन की तरह होती है। इसमें शरीर के आंतरिक अंगों को तीन आयामों में देखा जाता है। इसके लिए थ्रीडी आधुनिक मशीन और थ्रीडी चश्मे का सहारा लिया जाता है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पीके कसार ने नई तकनीक से सफल ऑपरेशन को बड़ी उपलब्धि बताया है।

रोबोटिक सर्जरी की ओर बढ़ाया कदम
मेडिकल कॉलेज में लेप्रोस्कोपिक सुविधा कई वर्ष से उपलब्ध थी। करीब तीन साल से एचडी लेप्रोस्कोपी की शुरुआत हुई। अब उससे उन्नत तकनीक (थ्रीडी) का इस्तेमाल लेप्रोस्कोपी सर्जरी में किया गया। थ्रीडी तकनीक से सफल सर्जरी के साथ ही पीडियाट्रिक सर्जंस ने रोबोटिक सर्जरी की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार को पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी की अनुमति के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है।

बच्चे की सफल थ्रीडी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई है। साधारणत: देश के बहुत बड़े प्राइवेट अस्पतालों में यह सुविधा होती है। मेडिकल कॉलेज में यह नि:शुल्क है। सरकार को शिशु रोबोटिक सर्जरी का भी प्रस्ताव भेजा गया है।
डॉ. विकेश अग्रवाल, विभागाध्यक्ष, शिशु शल्य क्रिया विभाग